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Tuesday, November 6, 2018

खुशी के दीपक | khushi k deepak | Hindi Kahani


HAPPY DIWALI TO ALL OF YOU


प्यार और खुशियां बांटने से यह दोगुनी होने के  साथ साथ    हमारे आसपास का माहौल भी खुशियो से भर जाता है। इस बात को मैनें ठीक से तब महसूस किया जब मै पढ़ने के लिए   बस से शहर तक का सफर करता था। रास्ते मे कुछ  कुम्हारो के कच्चे घर  आते और कुम्हार घरो के बाहर बैठे मिट्टी के बर्तन बनाते रहते  । मै वहा काम करते कुम्हारो  को देखकर अक्सर भावुक हो जाता और उनके रहन सहन के बारे मे सोचने लगता।

        रोज उनके सामने से गुजरते हुए भावुकता का एहसास होता। बस जब उनकी बस्ती से थोड़ी दूर आगे जाती, रास्ते मे छोटे छोटे बच्चे  पैदल अपने स्कूल की तरफ जाया करते। वह बच्चे उन्ही कुम्हारो के बच्चे थे जो मुझे रास्ते मे दिखाई देते। गरीब परिवारो से होने के कारण ना तो उनके पास कोई साईकिल था और ना ही वह बस मे सफर कर सकते थे । बस का कंडक्टर भी उन्हे बड़े भावुकता से देखा करता  ।



      एक दिन कंडक्टर ने बस कुम्हारो की बस्ती के सामने रुकवा ली। कंडक्टर बस से नीचे उतर उन कुम्हारो के पास जा के कुछ बातचीत करने लगा । मेरे मन मे एक बार तो आया के कुम्हारो और कंडक्टर के बीच क्या बातचीत हुई होगी । दूसरे दिन जब बस कुम्हारो की बस्ती के पास गई और कंडक्टर ने फिर से बस रुकवा ली पर इस बार वो उतरा नही बल्कि कुम्हारो के बच्चे बस मे चढ़ गए । यह देखकर मुझे बहुत खुशी हुई ।  हैरानी तो मुझे तब हुई जब कंडक्टर ने बिना टिकट के उन बच्चो को स्कूल के सामने उतार दिया । इस बात से मुझे और भी खुशी हुई और मै उस समय कंडक्टर और कुम्हारो के बीच हुई बातचीत को समझ चुका था ।

    अब रोज ही बच्चे बस मे स्कूल जाने लगे । बस का ड्राइवर अक्सर जब बस बस्ती के सामने रूकती तो गुस्से मे आ जाता । एक दिन मे आगे वाली सीट पर बैठा हुआ था । ड्राइवर ने कंडक्टर से कहा के तुम इन बच्चो के चक्कर मे बस को देरी करवा देते हो और इनसे किराया भी नही लेते । कंडक्टर मुस्कुरा दिया और बोला कि इनकी खुशी ही हमारा किराया है। कंडक्टर ने ड्राइवर को गुस्सा ना करने को कहा ।

      ऐसे ही दिन बीतते चले गए । दीवाली का त्योहार पास आ गया । कुम्हारो की दुकाने सज गई,  तरह तरह के मिट्टी से बने दिए सबको आकर्षित करने लगे । दीवाली से दो दिन पहले स्कूल जाने के लिए जब बच्चे बस मे चढ़े तो उनके हाथ  मे दो थैले  पकड़े हुए थे । वह थैले  बहुत भारी लग रहे थे । उन बच्चो ने थैले  कंडक्टर को दे दिए और कंडक्टर से कहा कि एक थैला ड्राइवर अंकल को दे दें।

       कंडक्टर ने एक थैला ड्राइवर की सीट के पास रख दिया और कहा कि यह कुम्हारो के बच्चे तुम्हारे लिए लाए है ।  शाम को जब कंडक्टर और ड्राइवर अपने काम से घर चले गए, ड्राइवर ने घर पहुंच कर उस थैले  को खोला तो उसकी आंखे खुशी से नम हो गई । उस थैले   मे बहुत सरे दीपक थे।  दीवाली के बाद जब फिर से स्कूल शुरू हुए तो ड्राइवर खुद ही कुम्हारो की बस्ती के सामने बस को रोक देता और खुशी खुशी बच्चो को बस मे चढ़ा लेता।

     

Tuesday, October 2, 2018

सकारात्मकता - सफलता की नींव | positivity - the base of success | Hindi kahani

जिंदगी के संघर्ष मे हार कर बैठना और इस हार के लिए बार-बार अपनी किस्मत को दोष देना, सिर्फ संघर्ष ना करने का बहाना मात्र है। यह छोटी सी कहानी भी इसी तरह के संघर्ष के ऊपर आधारित है । राहुल जो अपनी जिंदगी मे एक अच्छी नौकरी के लिए संघर्ष कर रहा है ।

   

    उसे लगातार दो साल हो गए नौकरी के लिए परीक्षा देते हुए , पर हर बार असफल हो जाता । असफलता का बोझ उस के दिमाग पर हावी होने लगा । एक बार तो वो 2 अंको से रह गया। इस बात का उसे बहुत अफसोस होने लगा। उसकी हिम्मत ने अब जबाब दे दिया। उस ने अपने आसपास नकारात्मकता का वातावरण बना लिया।

    राहुल इस का दोष अपनी किस्मत को देने लगा। परिवार और  लोगो की बाते सुन सुन के उसकी नकारात्मकता बढ़ने लगी ।  उसे लगने लगा कि नौकरी उसकी किस्मत मे नही । इस हालात मे उसने अपने जीवन को समाप्त करने के बारे मे सोच लिया । उसके दिमाग मे जरा भी ख्याल ना आया कि उसके बाद उसके परिवार के ऊपर क्या बीतेगी।

    राहुल अब अपना जीवन समाप्त करने के लिए घर से निकल पड़ा । रास्ते मे जाते हुए उसके मन मे एक डर सा भी था, पर उसके दिमाग मे अपने जीवन को समाप्त करने का भूत चढ़ चुका था । राहुल एक नदी किनारे पहुंचा। जैसे ही वो नदी मे कूदने लगता है , अचानक उसकी नजर एक पंछी पर पड़ जाती है ।

    पक्षी  पानी मे से मछली पकड़ने की कोशिश कर रहा था। पक्षी  अपनी चोंच पानी के अंदर ले जाता, पर कोई भी मछली उसकी चोंच मे नही आती। वो हर बार अपनी जगह बदलता, कभी पानी के बाहर आता और कभी अन्दर जाता मछली पकड़ने के लिए । राहुल किनारे पर खड़ा उस पक्षी  की हरकतो को बड़ी गौर से देखता है। 

   20 25 बार कोशिश करने बाद वो पक्षी  पानी से बाहर चला जाता है। 2 मिनट बाद वो पंछी फिर पानी मे उतरता है। वो एक स्थान पर बिना  हिले जुले खड़ा रहता है, मानो उसने इस बार मछली पकड़ने का पूरा मन बना लिया हो। इतने एक मछली उसके पास आती है। वो जल्दी से अपनी चोंच पानी अन्दर डालता है और इस बार मछली उसके चोंच मे आ जाती है ।

  यह घटना देखकर राहुल का मन बदल जाता है,  मानो जैसे उस पंछी ने राहुल के अन्दर सकारात्मकता भर दी हो । वो घर वापस चला जाता है । राहुल फिर से दिन रात मेहनत करता है । उसे जल्द ही नौकरी मिल जाती है । तो दोस्तो किस्मत को दोष देने से ज्यादा अपनी मेहनत पर विश्वास रखना चाहिए । कुदरत सबको एक जैसे मौके देती है। इन अवसरो का सही इस्तेमाल करना हमारे हाथ मे ही होता है। कभी भी अपने अन्दर नकारात्मकता ना आने दे और मेहनत करते रहे एक ना एक आपको सफलता जरूर मिलेगी ।


Friday, September 21, 2018

कहानी (kahani)- बंटवारे की दीवार | Bantware ki deewar | Hindi Kahani

खुले असमान की छत और हवाओं की ये दीवारे इंसानो को रास नही आई,  तो उसने लालच की दीवारो के ऊपर घमंड की छत डाल कर रहना शुरू कर दिया । पर उसका अपना ही खून इस झूठे आशियाने के टुकड़े टुकड़े करता रहा। इसी परंपरा को सच करती यह दो भाईयों की कहानी है ।



       सुनील और मुनीश दो भाई है जो अपनी अपनी पत्नी और बच्चो के साथ रहते है । इन भाइयों का बाप जो अपने भाई से अपने हिस्से की जमीन लेकर अलग हुआ,  उस पर बड़ी मेहनत से एक छोटा सा घर बनाता है । वो अपने आप को इस छोटे से घर का राजा और अपने दोनो बेटो को राजकुमार समझता है ।

    एक दिन मुनीश अपने दोस्तो के बीच खड़ा बाते कर रहा होता है । उसका दोस्त उसे कहता है कि तेरा बाप सुनील के बच्चो से बहुत प्यार करता है,  क्या वो बंटवारे के टाईम घर का ज्यादा हिस्सा उन्हें देगा। बाद मे उसका दोस्त यह कहकर बात टाल देता है कि उसने यह बात हँसी मजाक
मे कही है। पर कभी कभी बाहर वालो का मजाक इंसान के अंदर चिंता पैदा कर देता है । मुनीश भी इसी चिंता को अपने साथ घर ले जाता है ।

      मुनीश रात को अचानक ही यह बात अपनी पत्नी को बता बैठता है। अब उसकी पत्नी के मन मे भी अपने हिस्से को लेकर चिंता होने लगती है जिस के बारे मे उसने कभी सोचा ही नही । सुबह जब दोनो काम कर रही होती है मुनीश की पत्नी सुनील की पत्नी को यह बात बता कर अपने मन को हल्का करना चाहती है । वो सुनील की पत्नी को कहती है कि वो अपने घर मे इस से अच्छी रसोई बनाएगी। अब सुनील की पत्नी बात समझ जाती है ।

                    अब सुनील की पत्नी भी अपने हिस्से को लेकर चिंता से घिर जाती है । अब दोनो भाईयो और उनकी पत्नियो के बीच इसी को लेकर कहा सुनी लगी रहती । दोनो अलग अलग रहने की बात करने लगे। तंग आकर बाप ने घर के दो हिस्से कर दिए  और बीच मे दीवार कर दी। अब उसे अपना टाईम याद आ रहा था जैसे उसके भाई और उसने किया था। वैसा ही उसके साथ हो रहा है ।

  दोनो भाई अलग अलग रहने लगते है। दोनो बहुत ही खुश थे। एक दिन जब मुनीश के दोनो छोटे बेटे खेल रहे थे । तो खेल खेल मे उसके एक बेटे ने बोला कि वो भी बढ़ा होकर अपना एक घर बनाएगा । बंटवारे की दीवार की तरफ इशारा करते हुए कहता है कि वो इस से भी बड़ी दीवार बनाएगा । सुनील की पत्नी यह बात सुन के हैरान रह गई और उसे अपना भविष्य दिखाई देने लगा । जैसा उन्होंने किया वैसा ही उनके साथ होने वाला है उसे पता लग चुका था ।

 कभी भी बाहर वालो की बातो मे आकर अपना नुकसान नही करना चाहिए । यह कहानी से यह भी सीख मिलती है कि जैसा करोगे वैसा ही भरोगे। 

    

        

Wednesday, September 12, 2018

कहानी (kahani)- समंदर की लहरों सा गुस्सा | Samndar ki laharo sa gussa | Hindi Kahani


गुस्सा, अच्छी भली आँखो वाले इंसान को भी अंधा  कर दे। इस अंधेपन मे किसी को क्या और कितना नुकसान हो जाए, यह तो बाद मे ही पता चलता है। कुछ ऐसी ही कहानी मेरी है । बात उन दिनो की है जब मुझे नौकरी मिली ही थी। मेरे गुस्सैल स्वभाव का दफ्तर मे अभी किसी को पता नही था ।

   

      बचपन से ही मेरा स्वभाव गुस्सैल था। अपने साथियो और घर के लोगो से अपनी हर बात मनवाना अगर कोई ना माने तो गुस्सा,  हर बात पर जल्दबाजी मानो जैसे मेरी आदत ही बन गई हो। मेरे माता-पिता ने मुझे बहुत समझाया पर मैं खुद को उन से ज्यादा समझदार मानता था ।

पढ़े कहानी - अन्तर

     मेरी यही आदत दफ्तर मे भी जारी रही। अपने साथियो से छोटी छोटी बात पर बहस पडना। अगर काम ज्यादा मिल जाए तो गुस्सा आ जाना , मानो मुझे कभी भी  adjustment करना आता ही ना हो।

     मेरे इस स्वभाव के कारण मुझे सब नफरत करने लगे । इसी नफरत के चलते मेरे सीनियर ने मुझे ज्यादा काम दे दिया । मैंने गुस्से मे आकर काम करने से मना कर दिया और  सीनियर के साथ बहस हो गई । यह बात हमारे मैनेजर के पास पहुंच गई । मैनेजर ने मुझे और मेरे सीनियर को  cabin मे बुलाया । वहाँ भी मैं अपने गुस्से को कंट्रोल मे नही रख सका और मैनेजर ने मुझे सस्पेंड कर दिया ।

      जब मैं घर आया मैंने अपने माता-पिता को सारी बात बताई । सब इस बात से बहुत निराशा और उदास थे लेकिन अब क्या किया जा सकता था । गुस्से के कारण मुझे बहुत नुकसान और दुख हुआ । दो दिन मैं घर पर निराश होकर  बैठा रहा । मुझे इस हालत मे देखकर मेरे पिता जी ने मुझे शाम को अपने साथ समंदर  किनारे टहलने के लिए जाने को कहा ।

     शाम को जब हम समंदर के किनारे टहल रहे थे तो पिता जी ने मुझे एक बात बताई । उन्होंने कहा बहुत पहले समंदर मे एक बार तूफान उठा था और उसने अपने आसपास के किनारो पर रह रहे लोगो को डूबा दिया और बहुत नुकसान किया ।  उन्होंने कहा देखो आज समुंदर कितना शांत है और  सभी को खूबसूरत लग रहा है । पिता जी के इतना कहते ही मैं समझ गया कि उनका इशारा मेरी तरफ ही है । मैं पिता जी की बात समझ चुका था ।

        तब से मैं समझ गया कि  समुंदर इतना विशाल होकर अपनी सीमाओं मे रहता है । अगर समुंदर मे कोई लहर   ऊँची  उठती भी है तो अपने आप शांत  हो जाती है। इंसान का गुस्सा समंदर जैसा ही होता है अगर सीमाओं से बाहर चला जाए , अपना नुकसान तो होता ही है साथ मे अपने आसपास के लोगो को भी दुख पहुंचा देता है । इसीलिए इंसान को हमेशा गुस्से पर काबू रखना चाहिए ।

Sunday, September 9, 2018

कहानी (kahani) - मंजिल और चौराहा | Manzil or churaha | Hindi kahani

छोटी उम्र से ही हमारे दिमाग के अन्दर मंजिल तक पहुंचने का चौराहा बना दिया जाता है ।इस चौराहे से सही रास्ता चुनना बहुत मुश्किल होता है । एक student जो अभी 10th मे पढ़ रहा है , उसके माता-पिता,  रिश्तेदारो और आसपास के लोगो द्वारा अभी से इस चौराहे पर खड़ा कर दिया जाता है ।

    
   Student जो अभी पढ़ाई मे बहुत अच्छा है । वो अपनी क्लास मे से हर बार अव्वल आता है । ऐसे मे उसके घर परिवार के लोग बहुत खुश होते है । उन्होंने अभी से यह सोचकर रख लिया कि student  को आगे चलकर science की पढ़ाई करवाई जाएगी ।   उसके रिश्तेदारो और आसपास के लोगो द्वारा भी यही सुझाव दिया जाता है । कोई उसे commerce  और कोई उसे arts करने की सलाह देता है । ऐसे मे student को सही रास्ता नही मिलता ।

   Student जिसे कहानियो और साहित्य से जुड़ी किताबे पढ़नी बहुत अच्छी लगती है । वो अक्सर ही इन्हे पढ़कर बहुत खुश होता और कहानियो मे लिखे पलों मे कहीं खो जाता । student दसवीं के इम्तिहान मे पास हो जाता है और अब वो घड़ी आ जाती है जिसमे उसे अपने माता-पिता,  रिश्तेदारो और अनय लोगों द्वारा तैयार किए गए चौराहे पर से एक रास्ता चुनना होता है ।

  Student दबाव मे आकर 11वीं मे साईंस की पढ़ाई करने  लगता है लेकिन कुछ ही दिनो बाद उसे महसूस होता है कि उसके द्वारा चुना गया रास्ता गलत है । उसके माता-पिता ने उसे coaching classes ज्वाइन करवा के उसकी इच्छा बिना जाने ही उस पर दबाव डाल के इस रस्ते पर चलने को मजबूर कर दिया । यह रास्ता उसे मंजिल के उल्ट एक अंधेरी दुनिया की तरफ ले जाता है ।

    जब 12वी के इम्तिहानो मे student के कम नम्बर आते है तो उसे और उसके माता-पिता को बहुत निराशा होती है । उसे अपनी मंजिल तक पहुंचना अब नामुमकिन सा लगने लगता है। अब उसके माता-पिता और आसपास के लोगो द्वारा एक और नया चौराहा बना दिया जाता है । वो खुद रास्ता बनाने मे इस लिए असफल रहता है क्योंकि निराशा से उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है ।

     नए बनाए गए चौराहे से वो फिर से एक नया रास्ता चुन लेता है । इस बार वो डिग्री मे commerce ले लेता है। लगातार 3 साल बाद पढ़ाई करने के बाद वो एक प्राइवेट नौकरी  करने लगता है। पर वो अन्दर से बिल्कुल भी खुश नही था। इस दौरान उसके माता-पिता पिता और आसपास के लोगो द्वारा उसे बार-बार याद दिलाया जाता है कि अगर वो साईंस पढ़ लेता तो उसकी जिंदगी बन जाती ।

    Students के ऐसे हालातों का कारण उनके स्कूल भी बनते है। यहा students की नींव रटो और नकल की ईंटो से रखी जाती है । ऐसे मे जब कोई student बाहर मुकाबले के लिए जाता है तो यह नींव कमजोर दिखाई देती है ।

   Students को चाहिए कि ऐसे बनाए गए चौराहो से दूर रहे और अपने हुनर को पहचनाने की कोशिश करें। उनके द्वारा की गई सही पहचान उन्हे मंजिल तक खुद ब खुद ले जाएगी ।



Wednesday, September 5, 2018

आरटीकल (Article) - बिमारियो के जाल से बचाव | bimaryio k jaal se bachav | Hindi kahani

आज के समय हमारे चारो तरफ बिमारियों का जाल सा बिछ चुका है । तरह तरह की बिमारियां, जिनके बारे मे जानकारी और इन से बचे रहने के उपाय पता होना बहुत जरूरी है । नही तो यह मनुष्य के शरीर और उसके अंगो पर तो असर करती ही है पर साथ मे यह खर्चे का घर भी बना देती है । अमीर हो या गरीब आज के समय मे कोई भी इन से बच नही सका।

   

      डेंगू, मलेरिया  जैसी बिमारियां तो आम हो चुकी है । इस आरटीकल मे हम इन्ही बिमारियो से बचे रहने के कुछ उपायो के बारे मे बात करेंगे । कुछ सावधानियों , खान पान और अपनी सेहत का ध्यान रख के इन बिमारियो से बचा जा सकता है ।

1. डेंगू और मलेरिया जैसी बिमारियां मच्छरों के काटने से फैलती है ऐसे मे बाजुओं और टांगो को ढक कर रखे। रात को सोने के लिए मच्छरदानी या फिर मच्छरो  से बचाव के लिए क्रीम का इस्तेमाल करे।

2 . घर के आसपास पानी ना खड़ा होने दे। कूलरो मे पानी को 2  से 3 दिन मे जरूर बदल दे। घर मे रखे गमलो की साफ सफाई का भी ध्यान रखे।

3. अपने घरो मे पूरी तरह सफाई रखे । परदो एवं कोनो को अच्छी तरह से साफ कर ले। घर के शौचालय को साफ रखे। इन्हे साफ करने के लिए फिनाइल आदि का प्रयोग करे।

4. बरसातों के दिनो मे बच्चो को घर से बाहर  कम निकलने दे। उन्हे पूरे कपड़े पहनाकर रखे।  घर की छत पर पानी को इकट्ठा ना होने दे । पानी की टंकियों को साफ रखे और नियमित इनके पानी की जांच करते रहे।

5 . मच्छरो को मारने के लिए स्प्रे और मच्छरो को मारने वाली अगरबत्ती का इस्तेमाल करे। शाम के समय अपने घर की खिड़कियो को अच्छी तरह से बंद रखे।

6. घर मे रखे पशुओं और पालतू जानवरो का भी मच्छरो से बचाव करे। इन के रहने वाली जगह को भी साफ रखे तथा इनके आसपास मच्छरो से बचाव के लिए धुंआ करे।

7. किसी को बुखार हो जाए और दो तीन दिन तक लगातार रहे तो निकटतम डॉक्टर के पास जाए। अपने खून की जांच करवाए। डाक्टर की सलाह को अच्छी तरह माने और दी गई दवाईयों को टाइम से ले।

8 . डेंगू जैसे बुखार से शरीर मे सैल कम होने लगते है । ऐसे मे फलो का सेवन अधिक करे। कीवी फल जरूर खाए इस से सैलों की कमी पूरी हो जाती है । बकरी का दूध भी पिए यह भी सैल निर्माण करने मे सहायता करता है ।

9. डेंगू और मलेरिया हो जाने पर रेस्ट ज्यादा और काम कम करे। तरल पदार्थ का प्रयोग ज्यादा करे और पानी ज्यादा पीए।

10. नींबू पानी अधिक पीए इसमे विटामिन सी होता है जो शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है।

यह है डेंगू और मलेरिया जैसे बुखार से बचने के तरीके आप इन्हे अपना और अपने बच्चो का ध्यान रखे।

Sunday, September 2, 2018

कहानी (kahani) - सबक - The lesson | Sabak

1  साल हो गया मुझे सरकारी नौकरी के लिए exam देते,  पर हर जगह असफलता ही हाथ लगी । इसी संघर्ष के बीच किसमत ने मानो करवट ली। मेरा एक written exam कलीयर हो गया और अब interview की बारी थी ।  सभी पास और  चुने हुए उम्मीदवार मोहाली interview के लिए पहुंचे । पर मानो जैसे वहा भी असफलता मुझे अपने गले लगाने को तैयार बैठी हो। एक बार फिर निराशा हाथ लगी ।



उदास मन के साथ मे बस stop की तरफ चल पड़ा । मन मे चलने लगा कि घर वाले क्या कहेंगे?,  लोग और रिश्तेदार तरह-तरह की बाते करेंगे,  अब बहुत हो गया कोई private नौकरी ढूंढ लूगा।  असलताओं के थपेड़ो ने मेरे होंसले को तोड़ दिया था ।

         मैंने घर के लिए बस पकड़ ली। मेरी साथ वाली सीट पे एक लड़का आ बैठा । वो बहुत खुश नजर आ रहा था । मेरे हाथ मे प्रवेश पत्र देखकर उसने मुझे पूछा के तुम भी interview देकर आए हो क्या?  मैंने हाँ मे सिर हिला दिया और किस्मत का रोना रोने लगा । मैंने भी उसे यही पूछा और उसने  बताया कि वो भी interview के लिए आया और वो पास हो गया है ।  पास होने की खुशी उस के चेहरे पे साफ साफ दिख रही थी और मेरे चेहरे पर फेल होने का गम।

    बातों ही बातों मे मैनें उसे सारा दुख सुना दिया,  फिर उसने भी अपने संघर्ष के बारे मे बताया कि मैं तो तीन साल से लगातार exams दे रहा हू ,  2 साल बाद  मैं भी तुम्हारी तरह हिम्मत हार के बैठ गया था पर घर की गरीबी और लोगो की बातो ने मेरे इरादे को पक्का कर दिया । मैंने अगले साल पढ़ने मे दिन रात एक कर दी। अब मेरे सबर और मेहनत  का फल सबके सामने है ।

   उसकी इस बात ने मेरे अंदर उम्मीद की एक किरण जगा दी ।  मन ही मन मे मैने भी exam पास करने का ठान लिया ।  पूरे  2 साल बाद मुझे भी नौकरी मिल गई, मैं आज खुशी खुशी नौकरी कर रहा हू। सभी लोगो की बातो पर जैसे ब्रेक लगा गया हो । तो बात सिर्फ हिम्मत और होंसला बनाए रखने की है ।  कब और कहाँ किसी की कहीं बाते आप के मन को बदल कर रख दे किसी को भी नही पता, आप     मेहनत करते चले जाइए,  सफलताएं खुद ब खुद आपको मिलती जाएगी ।
    

     

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