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Sunday, May 17, 2020

समय की अहमियत || Hindi Story

एक दिन अचानक मेरे चाचा के लड़के का फोन आया कि बहुत जरूरी काम से उसे उत्तराखंड जाना है। एक सैकिंड के लिए पंजाब से उत्तराखंड की लंबी दूरी का ख्याल आया,  उन दिनों मेरी पढ़ाई खत्म हो चुकी थी और मेरे पास भी फ्री समय था, तो मैंने चाचा के लड़के को उत्तराखंड जाने के लिए हां कर दी ।



                            हम दोनो ट्रेन से उत्तराखंड की तरफ चल दिए । मैंने अपनी जिंदगी मे इतना लम्बा सफर पहली बार किया । रास्ते मे दिलकश नजारे देखते हुए मन रोमांचित हो उठता ।
तकरीबन 8 घंटे बाद हम लोग उत्तराखंड रामनगर पहुंच गए । शाम का समय था जब हम ट्रेन से उतरे तो भाई  ( चाचा का लड़का ) के मामा जी अपने अपने पूरे परिवार के साथ स्टेशन पर लेने आ गए । उनके चेहरो पर मुस्कान देखकर मन और भी खुश हो गया ।

         जब हम घर पहुंचे तो मैंने देखा कि उनका छोटा सा घर पक्का तो है लेकिन अभी घर का बहुत सा काम होना बाकी था । मैनें मामा जी की तरफ देखा और कहा कि "आप ने घर बहुत अच्छा बनाया है"।
मामा जी बोले " बेटा, मैंने सीमेंट का पलसतर और रंग भी करवा देना था पर इतने पैसे नही बचे थे।", "अब जब बाद मैं हाथ मैं पैसे आएगे और  सही समय आने पर सारा काम करवा दूंगा ।"

मैं मन ही मन मे सोचने लगा कि कही मामा जी को बुरा तो नही लगा,  वह ये तो नही सोच रहे कि मैंने मजाक मे ऐसा कह दिया । अगले दिन सुबह हम सब नाश्ते पर इकट्ठा हुए ।
मैंने मामा जी से पूछा कि आप करते क्या काम हो । उन्होंने बताया कि "मैं एक पलंबर हू।" उनकी बाते बहुत ही सुलझी हुई थी । उनकी तीन लडकियां थी और एक लड़का। लडका तो शहर से बाहर काम करता था  और तीनो लडकियां अभी पढ़ाई कर रही थी ।

    मैंने अपने भाई से पूछा कि वो मुझे यहा किस काम के लिए लाया है । उसने बताया यहा पर उसे किसी से पैसे लेने है और उसने कहा कि अभी हम 4 5 दिन यही है । हमने नैनीताल घूमने भी जाना है । यह सुनकर मेरी खुशी का ठिकाना नही रहा । गर्मी के दिन थे, हम सभी सारा दिन घर पर बैठे बातें करते रहे । मामा जी के सारे परिवार मे उनकी बातों असर साफ दिखाई दे रहा था । उनकी बड़ी लड़की ने कहा, वो भी पार्ट टाईम  काम पे जाती है पर अभी उसकी बी ए की परीक्षा आ जाएगी तो वो नही जा रही।

      सारे परिवार मे ऐसा कोई दुख नही था कि उनका घर छोटा है, उनकी आमदनी कम है। हमेशा चेहरे से खुशी
झलकती । सारा परिवार एक निश्चित दिनचर्या के अनुसार काम करता और समय का पूरा फायदा उठाता। शाम हुई तो मामा जी काम से लौट कर घर आए। वह बहुत थक चुके थे लेकिन कुछ समय आराम करने के बाद फिर से चले गए । मैंने मामी से पूछा के अब यह कहा चले गए है। मामी ने कहा, इन्होंने एक और घर का काम पकड़ रखा है। मैं यह सुनकर हैरान रह गया और मन मे सोचा कि ऐसा तो कोई द्रढ़ निश्चय वाला आदमी ही कर सकता है ।

           अगले दिन हम नैनीताल घूमने चले गए। सुन्दर पहाड़ो से घेरा हुआ ताल, बहुत ही मनमोहक दृश्य पेश कर रहा था। हमने वहां पूरा दिन बिताया और शाम को घर वापस आ गए । दूसरे दिन हमे पंजाब वापस आना था, घर आकर हमने अपना बैग पैक करना शुरू कर दिया। अगले दिन हम ट्रेन से पंजाब की तरफ चल दिए । रास्ते मे मन मे फिर से विचार चलने लगे कि मामा जी इतनी मेहनत करते है पता नही घर का बाकी काम पूरा कर पाएंगे या नही ।

       इस बात को दो साल बीत चुके थे । मेरे चाचा के लड़की की शादी थी तो मामा जी भी वहां पर आए हुए थे । मैंने उनसे मिला और बात करने लगा , इतने मे उन्होंने जेब से फोन निकाला और घर की फोटो दिखाने लगे । फोटो दिखाते हुए उनके चेहरे पर खुशी साफ साफ दिख रही थी। फोटो दिखाने के बाद उन्होंने मुझसे कहा कि " समय का अगर सही इस्तेमाल किया जाए और कड़ी मेहनत की जाए तो सब काम मुमकिन है।"


Thursday, May 14, 2020

हिन्दी शायरी ।। Hindi Shayari




क्या क्या कसूर बताऊं अपना, गर्म हवाएं इश्क की मुझे भी लगी है।
दिल तोड़ा है मैनें उस खुदा जैसी का,
और जिस हाल मे आज मैं हू.......
जरूर बद्दुआऐ उसी की लगी है।

बेपनाह करती थी प्यार वो मुझसे,  उसे लगा कि जिंदगी संवरने लगी  है ।
तोड़ा है मैंने उसका हर एक सपना,
और जिस तरह मेरे  सांसे रूकने लगी है।
जरूर बद्दुआऐ उसी की लगी है।

करती थी वफा वो मुझसे, लेकिन मैंने उसकी वफाएं
ठगी है।
धोखा किया है खुद अपनी जिंदगी से
और जिस तरह मेरी जिंदगी थमने लगी है।
जरूर बद्दुआऐ उसी की लगी है।

जैसे लड़ा करती थी वो मेरे लिए जमाने से
अब उसकी यादें मेरी तन्हाई से लड़ने लगी है।
जिस राह पर करती थी वो इंतजार मेरा
अब वो राह भी मुझे बेशरम समझने लगी है
जरूर बद्दुआऐ उसी की लगी है।
                           
                           Wrriten by - Rashpal Singh


दूर हो जाए, चाहे बात भी ना हो
मामूली सी बात पर टूट जाए,
ऐसा दोस्ती का रिश्ता ना हो

          Wrriten by - Rashpal Singh


याद है वो दिन ,
जब तेरे पास खड़ा था लाईब्रेरी मे
बहाना बना के किताब का...

तू तो ना मिली,
पर इतनी कशिश थी उस किताब मे
मैं आशिक हो गया उस किताब का....

     Written by - Rashpal Singh

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Tuesday, May 12, 2020

1000 मीटर दौड़ । Hindi kahani

जब हमारे आसपास नकारात्मकता फैल जाए, तो हमे सही लिया गया निर्णय भी गलत लगने लगता है। सारी परिस्थितियां हमारे खिलाफ जाती हुई दिखाई देती है। हमारा आत्मविश्वास टूट जाता है और हम असफलता की तरफ बढ़ते चले जाते है। लेकिन, अगर कोई हमें आशा की किरण दिखाए और हमें बोले कि तुम यह कर सकते हो तो हमारे अंदर एक सकारात्मक शक्ति का संचार होने लगता है। इस शक्ति से हमारे लिए गए निर्णय बिल्कुल सही लगते है और इनका परिणाम भी हमेशा अच्छा निकलता है।





    जोन एक मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखने वाला लड़का है। उसकी उम्र 26 साल है। उसे अपनी पढ़ाई किए हुए 3 साल गुजर गए है। वह एक अच्छा और होशियार लड़का है पर उसके अंदर आत्मविश्वास की बहुत कमी है। वह कोई भी निर्णय लेने से बहुत डरता है। इसी कारण  वो घर पर बैठा रहा। उसका शारीरिक वजन 98 किलोग्राम हो गया था। उसके लिए अब चलना फिरना भी कठिन हो गया था।

एक दिन उसके पिता जी अखबार पढ़ रहे थे। अखबार मे पुलिस विभाग की तरफ से नई भर्ती का विज्ञापन दिया गया था। उन्होंने जोन का भी फार्म भर दिया। अब जोन तो इस बात से असहमत था। लेकिन पिता जी के दबाव मे उस ने पुलिस की भर्ती के लिए  अभ्यास शुरु करने का निर्णय लिया। भर्ती मे सफल होने के लिए 1000 मीटर की दौड़ केवल चार मिनट मे करनी थी। यह जोन को बिल्कुल नामुमकिन सा लग रहा था।

जब जान पहली बार अभ्यास करने गया तो वो बिल्कुल अकेला था। उसने पहले दिन 10 मिनट मे दौड़ पूरी की। ऐसे ही वो चार दिन तक जाता रहा। उसके समय मे कोई फर्क नही पड़ा। एक दिन जान निराश होकर मैदान मे पड़ा रहा। अचानक उसका एक पुराना मित्र भी वहा पर आ गया। उसने अपने मित्र को सारी बात बताई । उसके मित्र ने उससे कहा कि वह घबराए नही। उसने जान से बोला कि वह दौड़ पूरी कर लेगा।

  अगले दिन जब जान ने अपने मित्र को घड़ी पकड़ा दी और खुद दौड़ने लगा। जब दौड़ पूरी हुई तो उसके मित्र ने जान से कहा कि तुमने 6 मिनट मे दौड़ लगा ली है। यह सुनकर जान बहुत खुश हुआ। अब उसके अंदर एक सकारात्मक सोच आ गई। वह सोचने लगा कि वह भी दौड़ सकता है। कुछ दिनो बाद जान के मित्र ने उसे कहा कि वह 4 मिनट मे दौड़ पूरी कर लेता है। अब वह भर्ती के लिए बिल्कुल तैयार है।

भर्ती वाले दिन जान ने पूरे 4 मिनट मे ही दौड़ पूरी की और वह सफल हो गया। जान बहुत खुश था। अगले दिन उसने यह बात अपने मित्र को बताई। उसके मित्र ने उसको बधाई दी। उसने जान से कहा कि उसने जान से झूठ बोला थाकि वह 4 मिनट मे दौड़ पूरी कर लेता है। असल मे वह 6 मिनट मे ही दौड़ पूरी करता था। यह बात सुनकर जान हैरान रह गया। उसके मित्र ने जान से कहा कि यह उसके अंदर आई सकारात्मक सोच का ही नतीजा है जो आज वह सफल हो गया।

Thursday, May 7, 2020

Hindi shayari ( हिन्दी शायरी)



दुनिया में माँ जैसा प्यार कोई नही देता।
हजार रिश्ते हो चाहे, पर माँ की जगह कोई नही लेता।
                  रशपाल सिंह ।


  

जहाँ जाऊ, चले ख्याल साथ तेरा।
इन हवाओं मे, इन सांसो मे
पतों की हलचल मे, दिल की धड़कन मे
जैसे सुबह देखकर खिलता गुलाब का लाल चेहरा
जहाँ जाऊ, चले ख्याल साथ तेरा।

चिड़ियों की चह़को मे, फूलो की महको मे
रात तारों मे, मेरे आंसू सारो मे
जैसे चांदनी रात मे,  चलता साया साथ मेरा
जहाँ जाऊ, चले ख्याल साथ तेरा।

मेरी जीत मे, मेरी हार मे
जो अधूरे रह गए हर सवाल मे
मेरा दिल भी अब ना रहा दिल मेरा ।
जहाँ जाऊ, चले ख्याल साथ तेरा।

                     Written by - Rashpal Singh

मैंने उसे छोड़ा, गलती मेरी थी
लेकिन उसकी बददुआ का असर तब पता चला
जब जिंदगी मे अकेले रह गए और वो भी पराया हो गया।

                                 Written by - Rashpal Singh






तुझे  तेरे ख्यालो मे मेरी सूरत  धुंधली लगती है।
मगर मेरे ख्यालो मे तेरी पूरी सूरत बनती है।
अगर यकीन नही
पूछ के देख कुदरत के नजारो को,
तुझे देख के उन्हे भी जिन्दगी खूबसूरत लगती है ।

                            Written by - Rashpal Singh



ना डर, इस अंधेरे रास्ते से
जिंदगी का रास्ता कठिन होता है ।
तू चलता जा, मिल जाएगी मंजिल तुझे
क्योंकि हर रात के बाद दिन होता है ।
     
                              By Rashpal singh

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Sunday, May 3, 2020

आत्मसम्मान ।

किसी भी व्यक्ति के लिए आत्मसम्मान जिंदगी का एक अहम हिस्सा होता है। जिस व्यक्ति मे आत्मसम्मान जिंदा हो, वह जिंदगी मे बेवजह किसी के आगे झुकता नही। ना ही वह किसी गलत रास्ते पर चलता है। अगर कोई व्यक्ति आत्मसम्मान नही रखता तो उसे जिंदगी मे आगे चलकर जरूर पछतावा होता है। यह कहानी भी एक व्यक्ति के आत्मसम्मान को दर्शाती है। आत्मसम्मान व्यक्ति के अन्दर कैसे सहजता और मेहनत करने का बल भर देता है, इस कहानी मे दर्शाया गया है।

                 

  बात उन दिनो की है जब मैं एक परीक्षा देने के लिए पटियाला गया हुआ था। मैंने बहुत सारी ऐसी परीक्षा दी थी, लेकिन मुझे कही भी नौकरी नही मिल रही थी। उस दिन मैं पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देने के लिए गया था। मेरी परीक्षा ठीक से हो गई थी। मेरे जैसे सैकंडो बेरोजगार यह परीक्षा देने आए थे। सब एक आशा लेकर आए हुए थे। परीक्षा के बाद सब एक दूसरे से परीक्षा के बारे मे ही बात करने लग गए। सब की स्थिति एक जैसी थी जिसके कारण घूलने मिलने मे टाईम नही लगा।

परीक्षा केन्द्र से बाहर निकलते ही मुझे भी एक परीक्षार्थी मिल गया। मैंने उस से उसकी परीक्षा के बारे मे पूछा। उस ने भी मुझे मेरी परीक्षा के बारे मे पूछा। जब मैंने उस से पूछा के कहा जाना है उसने? तो उसने बताया कि वह जालन्धर जाएगा। मैंने भी हंसकर उस से कहा कि मैं भी जालन्धर की तरफ ही जा रहा हू। तो हम दोनो बस स्टैंड की तरफ साथ मे ही चल दिए। बस स्टैंड पर जाकर हमने सबसे पहले दोपहर का खाना खाया।

 खाना खाने के बाद हमने टिकट काउंटर से टिकट लिया और बस मे बैठ गया। हम दोनो बाते करने लगे। मैंने उसे बताया कि मै दो साल से लगातार कई परीक्षाएं थे चुका हू। पर मेरी कही भी नौकरी नही लगी। उस ने मुझसे पूछाकि कोई और काम भी करते हो। मैंने हंस कर जबाब दिया कि अभी तक तो और कोई काम नही किया। मैंने भी उसे से पूछा कि तुम कोई और काम करते हो तो उसने बताया कि वह पहले से ही एक सरकारी विभाग मे काम कर रहा है।

उसने बताया कि उसकी शादी हो चुकी है। उसके दो बच्चे भी है। वह जो नौकरी कर रहा है, इसमे आमदनी बहुत कम है। इसलिए वह कोई दूसरी नौकरी करना चाहता है। इस तरह हम सफर मे बाते करते रहे। बातो बातो मे मैने उस से कहा कि मैं जिंदगी से बहुत परेशान हो मुझे कोई भी नौकरी नही मिल रही। इस के बाद उसने मुझे जो अपनी आपबीती सुनाई मे उसे सुनकर हैरान रह गया।

उसने बताया कि वह बेरोजगारी से तंग आकर दूसरे देश मे गया था। लेकिन उसने वहा पर स्थाई तौर पर रहने के लिए एक लड़की से शादी कर ली थी। वह भारत से ही थी। लेकिन जब मुझे कानूनी तौर पर वहा रहने के कागजात मिलने थे तो उस लड़की ने मुझे से यह कहना शुरू कर दिया कि वह उसकी वजह से पक्का होने जा रहा है। इस बात से मेरे आत्मसम्मान को बहुत धक्का लगा। मै दूसरे दिन ही भारत वापस आ गया ।

 घर आकर पहले तो मै बहुत निराश हुआ लेकिन मैंने मन ही मन मे सोच लिया था कि मै मेहनत कर के यही पर नौकरी करूंगा। मैंने दो साल तक लगातार मेहनत की और मुझे सरकारी नौकरी मिल गई। उसने मुझसे कहा कि जीवन मे किसी भी कठिन परिस्थिति मे घबराना नही चाहिए इसका डट कर मुकाबला करना चाहिए। कभी भी अपने आत्मसम्मान के साथ समझौता कर ना नही चाहिए। इस तरह मुझे इस सफर मे बहुत कुछ सीखने को मिला ।

Tuesday, July 23, 2019

टूटते हुए रिश्तो को कैसे बचाए ? How to save a broken relationship? (In Hindi)

टूटते हुए रिश्तो को कैसे बचाए 
How to save a broken relationship?

आज 21 वी सदी मे जैसे जैसे आदमी ने तरक्की ( development) की है साथ मे अपने धैर्य भी खोता चला गया है। किसी भी रिशते relataionships मे धैर्य Patience का होना बहुत जरूरी है। एक रिश्ते मे भरोसा trust  बनने के लिए बहुत समय लगता है। पर कुछ गलतफहमी के कारण हम रिशतो मे कड़वाहट लाने मे समय नही लगाते। अगर इन गलतफहमीयो misunderstanding को समय से दूर  ना किया जाए तो रिश्तो  relationships मे दूरिया बढ़ती चली जाती है और रिश्ते टूटने की कगार पर पहुंच जाते है। रिश्तो को टूटने से बचाने के लिए इन मे आई दूरियो के कारणो का पता होना बहुत जरूरी है।



        एक दूसरे को समय ना दे पाना। Can not give time to each other

अगर कोई भी जोड़ी couple एक दूसरे को समय नही दे पाती तो उनके रिश्तो मे दूरिया आना स्वाभाविक है। आज के इस समय मे सब अपने अपने कामो मे व्यस्त रहते है और उनके अंदर ज्यादा तनाव बढ़ जाता है। जिसके कारण वह घर आकर इस तनाव से मुक्ति के लिए या तो टीवी या फिर मोबाइल फोन मे गेम खेलकर अपना तनाव दूर करते है। ऐसे मे वह अपने पार्टनर को समय नही दे पाते। रिश्ते relationships मे नजदीकिया बनाए रखने के लिए एक दूसरे के साथ वक्त गुजारना बहुत जरूरी है।

एक दूसरे को समझना और एक दूसरे की बातो की इज्जत करना ।
Understanding each other and respecting each other's words.

रिश्ते को अच्छे से चलाए रखने के लिए एक और महत्वपूर्ण तथ्य है एक दूसरे के साथ समझ। एक दूसरे के हालातो conditions को समझना और उसके मुताबिक ही चलना चाहिए । ऐसे मे एक दूसरे के प्रति समर्पण दिखाना बहुत जरूरी हो जाता है । कई बार हम दूसरे की कही बातो को नही मानते ऐसा एक बार नही बार बार करते है तो दूसरे के अन्दर हीन भावना पैदा हो जाती है। ऐसी आदत होने के कारण जब चार बन्दे साथ मे हो तो तब भी हम अपनी बात मनवा कर रहते है चाहे वह गलत हो या सही । तो दूसरे मे बेइज्जती insult का स्वभाव आना स्वाभाविक है । इसलिए चाहिए कि एक दूसरे की कही बातो को सम्मान दें।

        किसी एक मे बुरी आदतो का होना। Someone has bad habits.

दोनो मे से किसी एक मे बुरी आदतो का होना रिश्ते के बिगाड़ के रख देता है। यह बुरी आदते ज्यादातर नशा alcholic करना , जुआ खेलना आदि होता है। इस से घर तो बर्बाद destroy होते ही है साथ मे रिशतो का तबाह होना तो तय होता है। घर मे रोज रोज शराब पीकर आना या ओर किसी तरह नशा करके आना लड़ाई का कारण बनता है । लड़ाई कभी कभी हद से बाहर हो जाती है और हाथापाई पर उतर आते है जिस के कारण किसी को गम्भीर चोट भी आ सकती है। ऐसी लड़ाई का बच्चो के ऊपर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। इसलिए घर परिवार एवं रिशतो relationships मे शांति बनाए रखने के लिए  बुरी आदत को छोड़ देना चाहिए ।

कामचोरी की आदत।
Moody habit

अगर जीवन साथी life partner मे से किसी एक मे भी कामचोरी की आदत हो तो यह भी एक कारण बन जाता है रिशतो मे खटास आने का। घर पर हम जब छोटे छोटे कामो से जी चुराते फिरते है और हर छोटे से काम के लिए अपने पार्टनर की और देखते है तो ज्यादा काम करने वाले के अन्दर चिड़चिड़ापन आ जाता है। एक दूसरे का सहयोग ना करना दूरिया तो बढाता ही है साथ मे जो तीसरा व्यक्ति आप को देख रहा हो तो वह भी समझ जाता है कि इन दोनो मे प्यार की कमी है। इसलिए घर पर अपने पार्टनर का छोटे छोटे कामो मे सहयोग दे, ऐसा करने से आपके बीच प्यार तो बढेगा ही साथ मे आप घर रह रहे और लोगो के लिए एक अच्छी मिसाल भी बन सकते है।

खराब आर्थिक स्थिति के कारण ।
Due to poor financial condition 

रिश्ते टूटने और बनने का एक महत्वपूर्ण तथ्य आर्थिक स्थिति भी है। यह देखने सुनने मे इतना महत्वपूर्ण नही लगता क्योंकि किस्से  कहानियो मे गरीबी मे भी अच्छे सम्बन्ध दिखाए जाते है। लेकिन जीवन की असलियत इसके बिल्कुल विपरीत होती है । प्यार के इलावा भी घर की दम्पति के ऊपर घर की सब जिम्मेदारी होती है जिन्हे वह सिर्फ पैसे से पूरा कर सकते है । इसका अभिप्राय यह नही कि आप अपने मन मे पैसो के प्रति लालच जगा ले। ज्यादा लालच करेंगे तो भी कही ना कही सम्बन्ध खराब होने का डर रहता है । इस कोशिश करे कि अपने घर की आर्थिक स्थिति मजबूत रखे। अगर आप के ऊपर बूरे दिन आ भी जाए तो साथ मिलकर उन बूरे दिनो का सामना करें।

भावनाओ का ना समझ पाना ।
Do not understand the feelings.

रिश्ते को बचाए रखने के लिए जैसे ऊपर दिए गए तथ्य जरूरी है वैसे ही एक-दूसरे की भावनाओ को समझना भी बहुत जरूरी है। शादी, प्रेम सम्बन्ध एक ऐसी गाड़ी की तरह होते है जिसमे भावनाओ का ईंधन जलता है। आपका पार्टनर आपसे किस समय क्या चाहता है इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है । यह दो पहिये की गाड़ी भावनाओ पर ही चलती है । शादी के रिश्ते मे आपके पार्टनर की भावनाए बढ़ी संवेदनशील हो सकती है। किसी भी खास मौके पर आप अपने पार्टनर को उपहार आदि दे। उसके साथ समय बिताए। ऐसे लमहो कॅ खास बनाने से रिशतो मे और भी मजबूती आती है।

गलतफहमियो के कारण। Due to misconceptions

अक्सर देखा गया है कुछ ऐसे रिश्ते भी होते है जो केवल गलतफहमियो के कारण खराब हो जाते है या फिर टूट जाते है। ऐसी गलतफहमीया किसी तीसरे व्यक्ति के कारण पैदा होती है। जब पार्टनर मे से कोई एक आपको तरजीह ना देकर किसी तीसरे व्यक्ति को ज्यादा महत्व देने लगता है तब गलतफहमीया स्वाभाविक रूप से पैदा हो जाती है । उदाहरण के तौर पर अगर लड़की विवाद के बाद अपने पति से सलाह ना करके अपने मायके वालो से ज्यादा सलाह करे या फिर लडका सलाह करते समय अपने पत्नी को शामिल ना करे तो मन के अन्दर यह आता है कि इसके जीवन मे मेरे लिए कोई महत्व नही है। अगर इनके अलावा आप अगर किसी तीसरे व्यक्ति से साधारण बात भी कर रहे है तो अपने पार्टनर को जरूर बताए इससे आपस मे विश्वास बना रहता है।

बिना वजह शक करना।

शक ऐसे बिमारी है जिसका कोई इलाज नही होता। अगर यह शक किसी शादीशुदा दम्पति के बीच पैदा हो जाए तो रिशता दिन ब दिन कमजोर होता चला जाता है। यह शक तब पैदा होता है जब हम जरूरत से ज्यादा अपने साथी की परवाह करने लग जाते है। अपने साथी को बाहर अकेले नही जाने देते। किसी और से साधारण तरीके से बात भी नही करने देते। हम बात बात पर अपने साथी के ऊपर नजर रखना शुरु कर देते है। ऐसे मे हमे करना यह चाहिए कि बैठ कर अपने साथी के साथ खुलकर उस विषय के ऊपर बात करे जिस पर आपको शक हो रहा हो। बात करने से आपका मन तो हल्का होगा ही और आपके सारे शक भी दूर हो जाएगे।

गलती को स्वीकार ना करना। 

Do not accept the mistake.

झगड़े की ओर वजह होती है गलती को स्वीकार ना करना जब हम छोटी छोटी बातो पर लड़ने झगड़ने लग जाते है तो कई बार यह झगड़े बहुत आगे तक बढ़ जाते है। अगर किसी एक से कोई गलती हो भी जाए तो थोड़ी सी हिम्मत और धैर्य दिखाए, अपने साथी से माफी मांगने मे संकोच ना करे। वैसे भी अगर एक छोटी सी माफी से झगड़ा सुलझ जाए तॅ इससे बढ़िया क्या हो सकता है। गलती को स्वीकार करना और बीती बातो को भूल जाना ही ठीक रहता है।

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Sunday, July 21, 2019

Berozgaro ki mehfil | बेरोजगारों की महफिल । hindi kahani



चार दोस्त हैं माया, छोटू, करण और जिंदर। चारो बेरोजगार,  लेकिन टहलने और खाने पीने के पके शौकीन । जेब खाली है, लेकिन दिल और दिमाग शौकीनी से भरे हैं। स्वभाव मे अमीर घरानो वाले दिखावे। अक्सर, सभी चारों एक-दूसरे को देखते रहते कि कौन खिलाएगा। एक दिन, माया ने सभी को  रेस्तरां में ले जाने की सलाह दी। रेस्तरां काफी महंगा था। इस बारे में सभी को पता था, लेकिन ठाठ  दिखाने के लिए  सभी ने हां कर दी।

चारो रेस्तरां चले गए। माया, जो केवल नाम ही माया थी। उसने वेटर को चार पीजे  लाने का आदेश दिया, वेटर ने कहा कि उनके पास केवल दो पीज़े बचे हैं। चारों ने नाक चढ़ाना शुरू कर दिया लेकिन,  माया खुश थी कि दो पीजो के पैसे देने पड़ेगे। जिंदर गुस्से मे आकर बोलता है कि इस से अच्छा तो हम घर पर ही पेट भर कर खाना खा लेते।  लेकिन जिंदर भी मन ही मन मे खुश था कि कम स कम आधा आधा तो खाने को मिलेगा ही। इतने मे पीजा आ जाता है और सभी आधा आधा खाने लग जाते है।

छोटू जिसका दिल एक रुपये के सिक्के से भी छोटा है। वह खाना शुरू करता है और सोचने लगता है कि उसके पास केवल 100 रुपये हैं, अगर माया ने उसे बिल का भुगतान करने के लिए कहा तो उसकी  बेइज्जती हो जाएगी। करन तो पूरे मजे मे पीजा खाने लगा हुआ था। सभी को पता है कि करन के पास ज्यादा से ज्यादा 30 40 रूपए होंगे।


पिज्जा खाने के बाद चारों एक-दूसरे का मुंह देखते हैं, फिर फिर बिल देने के लिए पैसो का अपना अपना हिस्सा देकर रेस्तरां से बाहर आ जाते है। चारो के चेहरों से बाहर आने के लिए बिल देने बैचेनी कम हो जाती है और सभी ने कहा कि आज खाने में बहुत मजा आया।


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