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Friday, September 21, 2018

कहानी (kahani)- बंटवारे की दीवार | Bantware ki deewar | Hindi Kahani

खुले असमान की छत और हवाओं की ये दीवारे इंसानो को रास नही आई,  तो उसने लालच की दीवारो के ऊपर घमंड की छत डाल कर रहना शुरू कर दिया । पर उसका अपना ही खून इस झूठे आशियाने के टुकड़े टुकड़े करता रहा। इसी परंपरा को सच करती यह दो भाईयों की कहानी है ।



       सुनील और मुनीश दो भाई है जो अपनी अपनी पत्नी और बच्चो के साथ रहते है । इन भाइयों का बाप जो अपने भाई से अपने हिस्से की जमीन लेकर अलग हुआ,  उस पर बड़ी मेहनत से एक छोटा सा घर बनाता है । वो अपने आप को इस छोटे से घर का राजा और अपने दोनो बेटो को राजकुमार समझता है ।

    एक दिन मुनीश अपने दोस्तो के बीच खड़ा बाते कर रहा होता है । उसका दोस्त उसे कहता है कि तेरा बाप सुनील के बच्चो से बहुत प्यार करता है,  क्या वो बंटवारे के टाईम घर का ज्यादा हिस्सा उन्हें देगा। बाद मे उसका दोस्त यह कहकर बात टाल देता है कि उसने यह बात हँसी मजाक
मे कही है। पर कभी कभी बाहर वालो का मजाक इंसान के अंदर चिंता पैदा कर देता है । मुनीश भी इसी चिंता को अपने साथ घर ले जाता है ।

      मुनीश रात को अचानक ही यह बात अपनी पत्नी को बता बैठता है। अब उसकी पत्नी के मन मे भी अपने हिस्से को लेकर चिंता होने लगती है जिस के बारे मे उसने कभी सोचा ही नही । सुबह जब दोनो काम कर रही होती है मुनीश की पत्नी सुनील की पत्नी को यह बात बता कर अपने मन को हल्का करना चाहती है । वो सुनील की पत्नी को कहती है कि वो अपने घर मे इस से अच्छी रसोई बनाएगी। अब सुनील की पत्नी बात समझ जाती है ।

                    अब सुनील की पत्नी भी अपने हिस्से को लेकर चिंता से घिर जाती है । अब दोनो भाईयो और उनकी पत्नियो के बीच इसी को लेकर कहा सुनी लगी रहती । दोनो अलग अलग रहने की बात करने लगे। तंग आकर बाप ने घर के दो हिस्से कर दिए  और बीच मे दीवार कर दी। अब उसे अपना टाईम याद आ रहा था जैसे उसके भाई और उसने किया था। वैसा ही उसके साथ हो रहा है ।

  दोनो भाई अलग अलग रहने लगते है। दोनो बहुत ही खुश थे। एक दिन जब मुनीश के दोनो छोटे बेटे खेल रहे थे । तो खेल खेल मे उसके एक बेटे ने बोला कि वो भी बढ़ा होकर अपना एक घर बनाएगा । बंटवारे की दीवार की तरफ इशारा करते हुए कहता है कि वो इस से भी बड़ी दीवार बनाएगा । सुनील की पत्नी यह बात सुन के हैरान रह गई और उसे अपना भविष्य दिखाई देने लगा । जैसा उन्होंने किया वैसा ही उनके साथ होने वाला है उसे पता लग चुका था ।

 कभी भी बाहर वालो की बातो मे आकर अपना नुकसान नही करना चाहिए । यह कहानी से यह भी सीख मिलती है कि जैसा करोगे वैसा ही भरोगे। 

    

        

Wednesday, September 12, 2018

कहानी (kahani)- समंदर की लहरों सा गुस्सा | Samndar ki laharo sa gussa | Hindi Kahani


गुस्सा, अच्छी भली आँखो वाले इंसान को भी अंधा  कर दे। इस अंधेपन मे किसी को क्या और कितना नुकसान हो जाए, यह तो बाद मे ही पता चलता है। कुछ ऐसी ही कहानी मेरी है । बात उन दिनो की है जब मुझे नौकरी मिली ही थी। मेरे गुस्सैल स्वभाव का दफ्तर मे अभी किसी को पता नही था ।

   

      बचपन से ही मेरा स्वभाव गुस्सैल था। अपने साथियो और घर के लोगो से अपनी हर बात मनवाना अगर कोई ना माने तो गुस्सा,  हर बात पर जल्दबाजी मानो जैसे मेरी आदत ही बन गई हो। मेरे माता-पिता ने मुझे बहुत समझाया पर मैं खुद को उन से ज्यादा समझदार मानता था ।

पढ़े कहानी - अन्तर

     मेरी यही आदत दफ्तर मे भी जारी रही। अपने साथियो से छोटी छोटी बात पर बहस पडना। अगर काम ज्यादा मिल जाए तो गुस्सा आ जाना , मानो मुझे कभी भी  adjustment करना आता ही ना हो।

     मेरे इस स्वभाव के कारण मुझे सब नफरत करने लगे । इसी नफरत के चलते मेरे सीनियर ने मुझे ज्यादा काम दे दिया । मैंने गुस्से मे आकर काम करने से मना कर दिया और  सीनियर के साथ बहस हो गई । यह बात हमारे मैनेजर के पास पहुंच गई । मैनेजर ने मुझे और मेरे सीनियर को  cabin मे बुलाया । वहाँ भी मैं अपने गुस्से को कंट्रोल मे नही रख सका और मैनेजर ने मुझे सस्पेंड कर दिया ।

      जब मैं घर आया मैंने अपने माता-पिता को सारी बात बताई । सब इस बात से बहुत निराशा और उदास थे लेकिन अब क्या किया जा सकता था । गुस्से के कारण मुझे बहुत नुकसान और दुख हुआ । दो दिन मैं घर पर निराश होकर  बैठा रहा । मुझे इस हालत मे देखकर मेरे पिता जी ने मुझे शाम को अपने साथ समंदर  किनारे टहलने के लिए जाने को कहा ।

     शाम को जब हम समंदर के किनारे टहल रहे थे तो पिता जी ने मुझे एक बात बताई । उन्होंने कहा बहुत पहले समंदर मे एक बार तूफान उठा था और उसने अपने आसपास के किनारो पर रह रहे लोगो को डूबा दिया और बहुत नुकसान किया ।  उन्होंने कहा देखो आज समुंदर कितना शांत है और  सभी को खूबसूरत लग रहा है । पिता जी के इतना कहते ही मैं समझ गया कि उनका इशारा मेरी तरफ ही है । मैं पिता जी की बात समझ चुका था ।

        तब से मैं समझ गया कि  समुंदर इतना विशाल होकर अपनी सीमाओं मे रहता है । अगर समुंदर मे कोई लहर   ऊँची  उठती भी है तो अपने आप शांत  हो जाती है। इंसान का गुस्सा समंदर जैसा ही होता है अगर सीमाओं से बाहर चला जाए , अपना नुकसान तो होता ही है साथ मे अपने आसपास के लोगो को भी दुख पहुंचा देता है । इसीलिए इंसान को हमेशा गुस्से पर काबू रखना चाहिए ।

Sunday, September 9, 2018

कहानी (kahani) - मंजिल और चौराहा | Manzil or churaha | Hindi kahani

छोटी उम्र से ही हमारे दिमाग के अन्दर मंजिल तक पहुंचने का चौराहा बना दिया जाता है ।इस चौराहे से सही रास्ता चुनना बहुत मुश्किल होता है । एक student जो अभी 10th मे पढ़ रहा है , उसके माता-पिता,  रिश्तेदारो और आसपास के लोगो द्वारा अभी से इस चौराहे पर खड़ा कर दिया जाता है ।

    
   Student जो अभी पढ़ाई मे बहुत अच्छा है । वो अपनी क्लास मे से हर बार अव्वल आता है । ऐसे मे उसके घर परिवार के लोग बहुत खुश होते है । उन्होंने अभी से यह सोचकर रख लिया कि student  को आगे चलकर science की पढ़ाई करवाई जाएगी ।   उसके रिश्तेदारो और आसपास के लोगो द्वारा भी यही सुझाव दिया जाता है । कोई उसे commerce  और कोई उसे arts करने की सलाह देता है । ऐसे मे student को सही रास्ता नही मिलता ।

   Student जिसे कहानियो और साहित्य से जुड़ी किताबे पढ़नी बहुत अच्छी लगती है । वो अक्सर ही इन्हे पढ़कर बहुत खुश होता और कहानियो मे लिखे पलों मे कहीं खो जाता । student दसवीं के इम्तिहान मे पास हो जाता है और अब वो घड़ी आ जाती है जिसमे उसे अपने माता-पिता,  रिश्तेदारो और अनय लोगों द्वारा तैयार किए गए चौराहे पर से एक रास्ता चुनना होता है ।

  Student दबाव मे आकर 11वीं मे साईंस की पढ़ाई करने  लगता है लेकिन कुछ ही दिनो बाद उसे महसूस होता है कि उसके द्वारा चुना गया रास्ता गलत है । उसके माता-पिता ने उसे coaching classes ज्वाइन करवा के उसकी इच्छा बिना जाने ही उस पर दबाव डाल के इस रस्ते पर चलने को मजबूर कर दिया । यह रास्ता उसे मंजिल के उल्ट एक अंधेरी दुनिया की तरफ ले जाता है ।

    जब 12वी के इम्तिहानो मे student के कम नम्बर आते है तो उसे और उसके माता-पिता को बहुत निराशा होती है । उसे अपनी मंजिल तक पहुंचना अब नामुमकिन सा लगने लगता है। अब उसके माता-पिता और आसपास के लोगो द्वारा एक और नया चौराहा बना दिया जाता है । वो खुद रास्ता बनाने मे इस लिए असफल रहता है क्योंकि निराशा से उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है ।

     नए बनाए गए चौराहे से वो फिर से एक नया रास्ता चुन लेता है । इस बार वो डिग्री मे commerce ले लेता है। लगातार 3 साल बाद पढ़ाई करने के बाद वो एक प्राइवेट नौकरी  करने लगता है। पर वो अन्दर से बिल्कुल भी खुश नही था। इस दौरान उसके माता-पिता पिता और आसपास के लोगो द्वारा उसे बार-बार याद दिलाया जाता है कि अगर वो साईंस पढ़ लेता तो उसकी जिंदगी बन जाती ।

    Students के ऐसे हालातों का कारण उनके स्कूल भी बनते है। यहा students की नींव रटो और नकल की ईंटो से रखी जाती है । ऐसे मे जब कोई student बाहर मुकाबले के लिए जाता है तो यह नींव कमजोर दिखाई देती है ।

   Students को चाहिए कि ऐसे बनाए गए चौराहो से दूर रहे और अपने हुनर को पहचनाने की कोशिश करें। उनके द्वारा की गई सही पहचान उन्हे मंजिल तक खुद ब खुद ले जाएगी ।



Wednesday, September 5, 2018

आरटीकल (Article) - बिमारियो के जाल से बचाव | bimaryio k jaal se bachav | Hindi kahani

आज के समय हमारे चारो तरफ बिमारियों का जाल सा बिछ चुका है । तरह तरह की बिमारियां, जिनके बारे मे जानकारी और इन से बचे रहने के उपाय पता होना बहुत जरूरी है । नही तो यह मनुष्य के शरीर और उसके अंगो पर तो असर करती ही है पर साथ मे यह खर्चे का घर भी बना देती है । अमीर हो या गरीब आज के समय मे कोई भी इन से बच नही सका।

   

      डेंगू, मलेरिया  जैसी बिमारियां तो आम हो चुकी है । इस आरटीकल मे हम इन्ही बिमारियो से बचे रहने के कुछ उपायो के बारे मे बात करेंगे । कुछ सावधानियों , खान पान और अपनी सेहत का ध्यान रख के इन बिमारियो से बचा जा सकता है ।

1. डेंगू और मलेरिया जैसी बिमारियां मच्छरों के काटने से फैलती है ऐसे मे बाजुओं और टांगो को ढक कर रखे। रात को सोने के लिए मच्छरदानी या फिर मच्छरो  से बचाव के लिए क्रीम का इस्तेमाल करे।

2 . घर के आसपास पानी ना खड़ा होने दे। कूलरो मे पानी को 2  से 3 दिन मे जरूर बदल दे। घर मे रखे गमलो की साफ सफाई का भी ध्यान रखे।

3. अपने घरो मे पूरी तरह सफाई रखे । परदो एवं कोनो को अच्छी तरह से साफ कर ले। घर के शौचालय को साफ रखे। इन्हे साफ करने के लिए फिनाइल आदि का प्रयोग करे।

4. बरसातों के दिनो मे बच्चो को घर से बाहर  कम निकलने दे। उन्हे पूरे कपड़े पहनाकर रखे।  घर की छत पर पानी को इकट्ठा ना होने दे । पानी की टंकियों को साफ रखे और नियमित इनके पानी की जांच करते रहे।

5 . मच्छरो को मारने के लिए स्प्रे और मच्छरो को मारने वाली अगरबत्ती का इस्तेमाल करे। शाम के समय अपने घर की खिड़कियो को अच्छी तरह से बंद रखे।

6. घर मे रखे पशुओं और पालतू जानवरो का भी मच्छरो से बचाव करे। इन के रहने वाली जगह को भी साफ रखे तथा इनके आसपास मच्छरो से बचाव के लिए धुंआ करे।

7. किसी को बुखार हो जाए और दो तीन दिन तक लगातार रहे तो निकटतम डॉक्टर के पास जाए। अपने खून की जांच करवाए। डाक्टर की सलाह को अच्छी तरह माने और दी गई दवाईयों को टाइम से ले।

8 . डेंगू जैसे बुखार से शरीर मे सैल कम होने लगते है । ऐसे मे फलो का सेवन अधिक करे। कीवी फल जरूर खाए इस से सैलों की कमी पूरी हो जाती है । बकरी का दूध भी पिए यह भी सैल निर्माण करने मे सहायता करता है ।

9. डेंगू और मलेरिया हो जाने पर रेस्ट ज्यादा और काम कम करे। तरल पदार्थ का प्रयोग ज्यादा करे और पानी ज्यादा पीए।

10. नींबू पानी अधिक पीए इसमे विटामिन सी होता है जो शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है।

यह है डेंगू और मलेरिया जैसे बुखार से बचने के तरीके आप इन्हे अपना और अपने बच्चो का ध्यान रखे।

Sunday, September 2, 2018

कहानी (kahani) - सबक - The lesson | Sabak

1  साल हो गया मुझे सरकारी नौकरी के लिए exam देते,  पर हर जगह असफलता ही हाथ लगी । इसी संघर्ष के बीच किसमत ने मानो करवट ली। मेरा एक written exam कलीयर हो गया और अब interview की बारी थी ।  सभी पास और  चुने हुए उम्मीदवार मोहाली interview के लिए पहुंचे । पर मानो जैसे वहा भी असफलता मुझे अपने गले लगाने को तैयार बैठी हो। एक बार फिर निराशा हाथ लगी ।



उदास मन के साथ मे बस stop की तरफ चल पड़ा । मन मे चलने लगा कि घर वाले क्या कहेंगे?,  लोग और रिश्तेदार तरह-तरह की बाते करेंगे,  अब बहुत हो गया कोई private नौकरी ढूंढ लूगा।  असलताओं के थपेड़ो ने मेरे होंसले को तोड़ दिया था ।

         मैंने घर के लिए बस पकड़ ली। मेरी साथ वाली सीट पे एक लड़का आ बैठा । वो बहुत खुश नजर आ रहा था । मेरे हाथ मे प्रवेश पत्र देखकर उसने मुझे पूछा के तुम भी interview देकर आए हो क्या?  मैंने हाँ मे सिर हिला दिया और किस्मत का रोना रोने लगा । मैंने भी उसे यही पूछा और उसने  बताया कि वो भी interview के लिए आया और वो पास हो गया है ।  पास होने की खुशी उस के चेहरे पे साफ साफ दिख रही थी और मेरे चेहरे पर फेल होने का गम।

    बातों ही बातों मे मैनें उसे सारा दुख सुना दिया,  फिर उसने भी अपने संघर्ष के बारे मे बताया कि मैं तो तीन साल से लगातार exams दे रहा हू ,  2 साल बाद  मैं भी तुम्हारी तरह हिम्मत हार के बैठ गया था पर घर की गरीबी और लोगो की बातो ने मेरे इरादे को पक्का कर दिया । मैंने अगले साल पढ़ने मे दिन रात एक कर दी। अब मेरे सबर और मेहनत  का फल सबके सामने है ।

   उसकी इस बात ने मेरे अंदर उम्मीद की एक किरण जगा दी ।  मन ही मन मे मैने भी exam पास करने का ठान लिया ।  पूरे  2 साल बाद मुझे भी नौकरी मिल गई, मैं आज खुशी खुशी नौकरी कर रहा हू। सभी लोगो की बातो पर जैसे ब्रेक लगा गया हो । तो बात सिर्फ हिम्मत और होंसला बनाए रखने की है ।  कब और कहाँ किसी की कहीं बाते आप के मन को बदल कर रख दे किसी को भी नही पता, आप     मेहनत करते चले जाइए,  सफलताएं खुद ब खुद आपको मिलती जाएगी ।
    

     

Thursday, August 30, 2018

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पहली कोशिश मे बहुत कम लोगों को सफलता मिलती है । इसीलिए हार से घबराए नही , अपनी मंजिल की ओर सदा बढ़ते रहना चाहिए । पूरे हौसले के साथ हर बार कोशिश करो। लोगो की परवाह किए बिना कि वो क्या कहते है । सदा आगे बढ़ते रहो आपको सफलता जरूर मिलेगी


Vich payia kitab de
Full patiyaa gulab diya
Yaddan teriyan di
Mehak pyia khilar diya
Tereya khayla vich , vrkya de ute
Jo likhya aa nam tera
Eh us nam nu shingar diya.



सफलता का मतलब शायद बहुत लोगों के लिए दूसरो से ऊपर उठना ही है या फिर कहो दूसरो से आगे निकलना ही है।

वो दूसरो से आगे भी निकल जाते है और खुशियाँ मनाने लग जाते है । पर कुछ टाइम बाद ये खुशियाँ फीकी पड़ जाती है ,  क्योंकि कि इस दौरान वो अपने आप से बहुत दूर हो जाते है

तो जरूरत है पहले अपने आप को जीतने की, अपने मन पर काबू पाने की , ताकि  दुनियावी खुशी की जगह रुहानी खुशी हासिल की जा सके। क्योंकि अन्दर से खुश आदमी बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल कर सकता है,  वो भी बिना किसी घमंड के ।

safalta da matlab shayad bahut loka lyi dujya to upar utthna hi hai ya kaho dujya to agge niklana hi hai.
oh hora to agge nikal v jande han te khushia v manaunde han is gal dia. pr kujh sma pake eh khushia fikkia jehia laggan lgdia han, kyuki is daur ch kite na kite apne ap to koha dur ho jande ne
so lodh hai pehla apne ap nu jittan di, apne man te kabu paun di, k duniavi khushia di jagah ruhani khushi hasil kiti jave. kyuki rooh to khush bnda vdde to vada mukam hasil kr skda hai, bina kise hankar te haumai to


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Wednesday, August 29, 2018

कहानी (kahani) - अन्तर | Antar - Hindi kahani

रोजाना दफ्तर जाने के लिए मैं 50 किलोमीटर का सफर तय करती हू। मेरे सफर मे एक main bus stop और बाकी 5-7 गांव के छोटे bus stop आते, हर stop पर कुछ  यात्री चढ़ते और उतरते। हर रोज का सफर कुछ ना कुछ नया सिखा जाता  और  सफर मे कई तरह की बाते हो जाती। कुछ इसी तरह की बात मेरे मन के अन्दर गहरी छाप छोड गई और साथ मे कुछ सवाल भी।



       मैं एक दिन जब दफ्तर जा रही थी एक गांव के stop से एक औरत अपने छोटे बच्चे के साथ बस मे चढ़ी। बस मे उसके बैठने के लिए सीट नही थी। वो अपना बच्चा उठाए अकेली ही बस मे खड़ी थी। देखने मे बहुत गरीब थी और शयाद एक मजदूर औरत हो। वो बहुत मुश्किल से बच्चा संभाल कर खड़ी थी । 5 -10 मिनट हो गए,  पर किसी ने भी उसे बैठने के लिए सीट ना दी।

          मैं चाहती थी कि उसे अपनी सीट बैठने के लिए दे दूँ, लेकिन खुद गर्भवती होने के कारण ये मेरे लिए मुश्किल था। मैं मन ही मन मे उसे सीट ना देने के कारण दुखी थी। इतने मे अगला stop गया । पर कोई भी सवारी नीचे ना उतरी और ना ही उस औरत को सीट मिली । stop से college जाने वाली तीन चार लड़कियां बस मे चढ़ी । 1-2 मिनट मे किसी ना किसी ने उन लड़कियों को सीट दे दी ।

        अब यह सब देखकर मेरे मन मे बहुत सारे सवाल खड़े हो गए । क्या उन लड़कियों के हाथों मे पकड़ी किताबे उस औरत के हाथो मे पकड़े हुए बच्चे से भारी थी, जो उन्हें पकड़ कर खड़े रहना मुश्किल हो जाता ? क्या एक औरत का सम्मान अमीरी और गरीबी देखकर किया जाता है ?क्या एक गरीब और माँ जो एक औरत है उसके प्रति लोग अपना नजरिया सहायता वाला नही रख सकते ? क्या एक माँ को सीट देकर उन लड़कियों को सीट देने से ज्यादा संतुष्टी नही मिलती। लोगो की यह सोच अमीरी और गरीबी देखकर मदद करना मेरे दिल मे गहरी चोट पहुंचा गई ।
      

            

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