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Thursday, August 30, 2018

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पहली कोशिश मे बहुत कम लोगों को सफलता मिलती है । इसीलिए हार से घबराए नही , अपनी मंजिल की ओर सदा बढ़ते रहना चाहिए । पूरे हौसले के साथ हर बार कोशिश करो। लोगो की परवाह किए बिना कि वो क्या कहते है । सदा आगे बढ़ते रहो आपको सफलता जरूर मिलेगी


Vich payia kitab de
Full patiyaa gulab diya
Yaddan teriyan di
Mehak pyia khilar diya
Tereya khayla vich , vrkya de ute
Jo likhya aa nam tera
Eh us nam nu shingar diya.



सफलता का मतलब शायद बहुत लोगों के लिए दूसरो से ऊपर उठना ही है या फिर कहो दूसरो से आगे निकलना ही है।

वो दूसरो से आगे भी निकल जाते है और खुशियाँ मनाने लग जाते है । पर कुछ टाइम बाद ये खुशियाँ फीकी पड़ जाती है ,  क्योंकि कि इस दौरान वो अपने आप से बहुत दूर हो जाते है

तो जरूरत है पहले अपने आप को जीतने की, अपने मन पर काबू पाने की , ताकि  दुनियावी खुशी की जगह रुहानी खुशी हासिल की जा सके। क्योंकि अन्दर से खुश आदमी बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल कर सकता है,  वो भी बिना किसी घमंड के ।

safalta da matlab shayad bahut loka lyi dujya to upar utthna hi hai ya kaho dujya to agge niklana hi hai.
oh hora to agge nikal v jande han te khushia v manaunde han is gal dia. pr kujh sma pake eh khushia fikkia jehia laggan lgdia han, kyuki is daur ch kite na kite apne ap to koha dur ho jande ne
so lodh hai pehla apne ap nu jittan di, apne man te kabu paun di, k duniavi khushia di jagah ruhani khushi hasil kiti jave. kyuki rooh to khush bnda vdde to vada mukam hasil kr skda hai, bina kise hankar te haumai to


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Wednesday, August 29, 2018

कहानी (kahani) - अन्तर | Antar - Hindi kahani

रोजाना दफ्तर जाने के लिए मैं 50 किलोमीटर का सफर तय करती हू। मेरे सफर मे एक main bus stop और बाकी 5-7 गांव के छोटे bus stop आते, हर stop पर कुछ  यात्री चढ़ते और उतरते। हर रोज का सफर कुछ ना कुछ नया सिखा जाता  और  सफर मे कई तरह की बाते हो जाती। कुछ इसी तरह की बात मेरे मन के अन्दर गहरी छाप छोड गई और साथ मे कुछ सवाल भी।



       मैं एक दिन जब दफ्तर जा रही थी एक गांव के stop से एक औरत अपने छोटे बच्चे के साथ बस मे चढ़ी। बस मे उसके बैठने के लिए सीट नही थी। वो अपना बच्चा उठाए अकेली ही बस मे खड़ी थी। देखने मे बहुत गरीब थी और शयाद एक मजदूर औरत हो। वो बहुत मुश्किल से बच्चा संभाल कर खड़ी थी । 5 -10 मिनट हो गए,  पर किसी ने भी उसे बैठने के लिए सीट ना दी।

          मैं चाहती थी कि उसे अपनी सीट बैठने के लिए दे दूँ, लेकिन खुद गर्भवती होने के कारण ये मेरे लिए मुश्किल था। मैं मन ही मन मे उसे सीट ना देने के कारण दुखी थी। इतने मे अगला stop गया । पर कोई भी सवारी नीचे ना उतरी और ना ही उस औरत को सीट मिली । stop से college जाने वाली तीन चार लड़कियां बस मे चढ़ी । 1-2 मिनट मे किसी ना किसी ने उन लड़कियों को सीट दे दी ।

        अब यह सब देखकर मेरे मन मे बहुत सारे सवाल खड़े हो गए । क्या उन लड़कियों के हाथों मे पकड़ी किताबे उस औरत के हाथो मे पकड़े हुए बच्चे से भारी थी, जो उन्हें पकड़ कर खड़े रहना मुश्किल हो जाता ? क्या एक औरत का सम्मान अमीरी और गरीबी देखकर किया जाता है ?क्या एक गरीब और माँ जो एक औरत है उसके प्रति लोग अपना नजरिया सहायता वाला नही रख सकते ? क्या एक माँ को सीट देकर उन लड़कियों को सीट देने से ज्यादा संतुष्टी नही मिलती। लोगो की यह सोच अमीरी और गरीबी देखकर मदद करना मेरे दिल मे गहरी चोट पहुंचा गई ।
      

            

Monday, August 27, 2018

आरटीकल (Article) - टेलीविजन के बदलते युग | Television ke badlate yug

आज के टाईम मे समाज पर अगर किसी चीज का सबसे ज्यादा असर होता है तो वह है टेलीविजन । टेलीविजन के विकास के साथ साथ इसे देखने का नजरिया भी बदल चुका है । टेलीविजन अब एक मनोरंजन का साधन ही नही बल्कि  समाज की बनावट तय करने वाला साधन बन चुका है । टेलीविजन ने अपने इस विकास के सफर मे अनेको तबदीलीयाँ देखी और विज्ञान के इस युग मे अभी भी बहुत तेजी से टेलीविजन अपनी रूप रेखा को बदल रहा है ।


           20वीं सदी मे शुरू हुआ टेलीविजन का सफर अब 21वीं सदी के आधुनिक युग मे पहुंच चुका है । पहले टेलीविजन सैट मे सी आर टी का उपयोग किया जाता था । और इसकी बाहर की बाॅडी लकड़ी की होती थी । इसके साथ एक एंटीना भी होता था जिसे सैट कर के लोकल रेंज के चैनल देखे जा सकते थे । यह टेलीविजन ब्लैक एंड व्हाइट होते थे।

         पहले टेलीविजन पर सिर्फ कुछ गिने-चुने ही प्रोग्राम आते थे । इसके बाद धीरे-धीरे कलर्ड टेलीविजन आने लगे  , इसके साथ ही इस पर आने वाले चैनल की संख्या भी बढ़ गई। 90 के दशक के आते आते  टेलीविजन के साथ रिमोट का प्रचलन बढ़ गया। टेलीविजनों की बिक्री मे भी बढ़ोतरी होने लगी । टेलीविजन अब आम लोगो की पहुंच से दूर नही रह गया था।

         टेलीविजन की बिक्री मे बढ़ोतरी के पीछे का कारण एक तो इसकी कीमत और दूसरा चैनलो की होड थी जिस मे तरह तरह के मनोरंजक सीरियल दिखाने शुरू कर दिए थे । अब घरों मे लोग अपना फ्री टाइम टेलीविजन देखकर ही गुजारने लगे थे । न्यूज चैनलो की भरमार हो गई थी । दुनिया के कोने-कोने से खबरे अब घर बैठे टेलीविजन पर दखी जा सकती थी ।

          एंटीना की जगह केबल तारो ने ले ली। कुछ पैसे चुकाकर लोग अनेको चैनल टेलीविजन पर देखने लगे । केबल का सबसे बड़ा  फायदा यह हुआ के  एंटीना को बार-बार सैट करने के झंझट से छुटकारा मिल गया।

        जैसे जैसे टैक्नोलॉजी मे बदलाव आया सी आर टी टेलीविजन की जगह ऐल सी डी ने ले ली । इस प्रकार के टेलीविजन महंगे जरूर थे लेकिन यह बिजली की बहुत ज्यादा बचत करते थे और आँखो के लिए भी कम नुकसानदायक थे। अब एल सी डी की जगह एल ई डी ने ले ली है । यह ऐल सी  डी से भी कम बिजली की खपत करती है । इन दोनो प्रकार के टेलीविजन का आकार भी बड़ा होता है ।
       
   केबल की जगह डी टी एच आ गए है । जो डिजीटल टैक्नोलॉजी से चैनलो को एच डी दिखाने का काम करते है।
इस प्रकार टेलीविजन का विकास होते आ रहा है और 20वीं सदी से लेकर अब तक टेलीविजन देखने के ढंगो मे की तरह के बदलाव आए।

Saturday, August 25, 2018

आरटीकल (Article) - स्कूल Exams की तैयारी | School Exams ki Tyari

स्कूल मे पढ़ रहे बच्चो को सब से ज्यादा टेंशन तब होती है, जब उनके exams सिर पे आ जाते है । ऐसे मे बच्चो को सही ढंग से तैयारी करने और तनाव से मुक्त रहने के लिए हम इस आरटीकल मे बात करेंगे । अलग अलग बच्चो का अपना अपना ढंग होता है तैयारी करने का कुछ बच्चे सिर्फ exams के कुछ दिन पहले ही तैयारी करते है और कुछ बच्चे पूरे साल से ही तैयारी कर रहे होते है।

   

      वैसे तो सही तरीका पढ़ने का यही है कि सारा साल अपना sallybus ज्यादा से ज्यादा पूरा किया जाए। पर आज कल बच्चों का ध्यान पढ़ाई मे कम और घूमने फिरने,  electronic gadgets मे ज्यादा रहता है । ऐसे मे  बच्चो को चाहिए कि वह exam से 2-3 महीने पहले तैयारी शुरू कर दे। सबसे पहले तो बच्चो को चाहिए के अपनी कमज़ोरिया ढूंढे जिस भी subject मे कमजोर है उसकी तैयारी अच्छे से करे।

         इन दो से तीन महीनो मे बाहर कम घूमे और टेलीविजन भी कम देखे। अपना पूरा ध्यान पढ़ाई मे रखे। दिन मे कम से कम पांच से छह घंटे तक पढ़े। अपना पूरा टाईम टेबल सैट कर ले। सभी  विषयो के पाठ्यक्रम को अच्छी तरह से देख ले।  सभी जरूरी प्रश्नोत्तर पर निशान लगा ले, उन्हे  बार बार दुहराए। हर एक घंटे के बाद दस मिनट की ब्रेक ले और अपने दिमाग को रेस्ट दे।
           
           अगर पढ़ाई मे आपको किसी भी तरह की मुश्किल आए तो आप अपने टीचर्स की सहायता ले। हफ्ते मे एक दिन अपने दोस्तो के साथ मिलकर पढ़े और अपने doubts clear करे। अपने माता-पिता और बड़े भाई बहन की भी सहायता ले। अगर आप किसी subject मे ज्यादा कमजोर है तो उस  subject की कोचिंग रख ले , जो भी कोचिंग सेंटर मे पढ़ाया जाए उसे घर जा के जरूर दोहराए।

          पढ़ाई मे ध्यान के साथ साथ अपने सेहत का भी पूरा ध्यान रखे। अपने खाने का ध्यान रखे। ताजा खाना ही खाए। फलो का सेवन करे। इन दिनो मे आपका स्वास्थ्य ठीक रहना चाहिए ताकि आप का ध्यान पढ़ाई मे अच्छे से लग सके। सुबह या शाम को बाहर खुली हवा मे सैर करने जाए ताकि आप का दिमाग ताजा हो सके और आप फिर से पढ़ाई के लिए तैयार हो सके।

          ध्यान रखे , कभी भी परीक्षा के दिनो मे दबाव मे ना आए , कई बच्चे दबाव मे आकर और दूसरो की बातों मे आकर परीक्षा पास करने का गलत रास्ता अपना लेते है । वह नकल के सहारे परीक्षा पास करने की कोशिश करते है। यह तरीका बहुत ही गलत है । कई बार बच्चा नकल करते पकड़ा जाता है और उस पर परीक्षा के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाता है इस तरह बच्चे का ज्यादा नुकसान होता है ।

          अंत मे बच्चो यही कहना चाहगे कि परीक्षा पास करने के लिए कभी भी नकल का रास्ता न अपनाए , मेहनत करे अपने ऊपर विश्वास रखे। कभी भी अपने अंदर नकारात्मकता ना आने दे। आपको आपकी मेहनत का फल जरूर प्राप्त होगा ।

Wednesday, August 22, 2018

आरटीकल (Article) - कसरत और सेहत | kasrat or sehat

जीवन मे सभी कार्य को ठीक से करने के लिए सेहत का ठीक रहना बहुत ही आवश्यक है । हम अपने जीवन का आनंद भी तभी ले सकते है अगर हमारी सेहत ठीक रहेगी ।
इसे ठीक रखने के लिए हमे रोजाना कसरत की जरूरत होती है । आज का समय टैक्नोलॉजी का है यहाँ इंसान के पास अपने काम से बिल्कुल भी फुर्सत नही है और हमारा शरीर कई  रोगो की चपेट मे आ चुका है ।

   

        पुराने समय मे लोग कम दूरी तय करने के लिए  पैदल ही एक जगह से दूसरी जगह चले जाते थे । लोगो के घर खुले एवं बड़े होते थे। सभी अपने-अपने काम को हाथो से ही कर लेते थे जिसकी वजह से उन्हे कसरत की ज्यादा जरूरत नही पडती थी। आज के समय मे सब के पास दूर और पास जाने के लिए सब के पास मोटर गाड़ी है, स्कूटर है। घर मे काम करने के लिए तरह-तरहकी मशीन आ चुकी है । हाथ से काम ना करने और पैदल ना चलने की वजह से  हमारी सेहत को बहुत नुकसान हो रहा है ।

               निरोगी रहने के लिए कसरत बहुत जरूरी है । वैसे कसरत कई तरह की होती है । जिसमे सैर , तरह तरह के व्यायाम आ जाते है । सबसे अच्छी कसरत सुबह की सैर को माना जाता है । इस समय हवा भी साफ होती है और  सुबह की शांति मन को भी शांत कर देती है। हम सैर शाम के समय भी कर सकते है । डाक्टरों की माने तो प्रतिदिन 2 से 3 किलोमीटर तक सैर करनी चाहिए ।


         सैर करने का सही तरीका भी आना चाहिए,  ताकि सैर का अधिक से अधिक लाभ मिल सके । लम्बे लम्बे कदमो के साथ बाँहो को जोर जोर से हिलाना चाहिए । इस  से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और साथ मे पसीना आने से शरीर के अंदर जमा हानिकारक कीटाणु भी बाहर आ जाते है । जिन लोगो के घुटने,  कमर आदि मे दर्द रहता है उन्हे तो सैर के साथ साथ कोई हल्का व्यायाम भी करना चाहिए ।

     तंदुरूस्त रहने के लिए हम सैर के इलावा भी बहुत कुछ कर सकते है जैसे कोई खेल खेल सकते है , साइकिल चलाना अतयादि।

   कसरत करने के लाभ

कसरत करने से हमारे शरीर को ईतरह की बिमारियो से छुटकारा मिलता है । हमारा वजन कंट्रोल मे रहता है । खून का चक्कर सही होता है ।

कसरत से कैसट्रौल भी कंट्रोल मे रहता है ।  यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। दिमाग तक सही ढंग से आक्सीजन पहुंचती है और दिमाग सही ढंग से काम करता है।

कसरत करने से त्वचा भी साफ होती है और त्वचा संबंधी रोगो से भी छुटकारा मिलता है ।

   इसलिए स्वस्थ रहने के लिए हमे दिन मे कम से कम एक बार कसरत जरूर करनी चाहिए ।

Monday, July 30, 2018

कहानी (kahani) - Vatavarn da dushman - pardushan

Jdo insani sharir  nu bimari lgdi hai te usda ilaz sme te na hove, oh la-ilaz bn jandi hai. Kuj eda de dor vicho e sadi dhrti da vatavarn guzr reha hai. Jisnu pardoshan naam di bhyank bimari lgi hoyi hai. Jekr es nu  sma rehndya thik na kita gya tan a v la ilaj bn javegi.

              Insan diya angeliya karan aaj dhrti dya anga hwa, pani, mitti nu pardoshan di bimari lg chuki hai jngla di ktayi ne barisha de chakr nu enj prbavit kita hai jive bimar sharir ch khoon da dora prbavit hunda hai. Hare bhre jangla di than cement de jungla ne le lyi . Facotriya vicho niklya jehr draywa vich ghul reha hai, te peen wale pani ate machiya aad lyi v nuksan dyak hai.

               Cara, motorcycla ate factoriya cho niklda dhua hwa pardoshan da km krda hai. Te dhrti da dam es tra gut reha hai jive azgar apne lapete ch aye shikar da dam gutda hai. Eh sb insan diya had to vd lora krke ho reha hai. Jungla di ktayi ate kudrat nal ched chad ne dhrti di shrirk bnavat nu bigad k rkh dita hai.

           Aaj a.c , cara, friza di vrto vd gyi hai te ehna vicho nikl rhiya jehrliya gasa insan ate janwara de nal nal dhrti di chmdi nu v cancer da rog de rhiya han. Ehna gasa ne dhrti de tapman nu vdauna shuru kr dita hai jo gleciara nu pigla reha hai.

         Ajhe halat bn chuke hn ki hun peen da saf pani mul vik reha hai . Jithe pani jyada hai uthe es di anewah barbadi kiti ja rhi hai. Pani da star khtre tk ght chuka hai. Oh din dor nhi jdo dhrti te kuj hisse registan bn jange.

        Jekr cheti he es bimari da ilaz na kita gya tan es de sitte sadi aaun wali peedi nu bhugtne pe skde han. Insan nu aaj  apniya lora upr pabandi laun di lor hai. Es lyi us nu kuj jarori kadam aaj to he chukne paine han. Rukha di ktayi te lgam ate nwe rukh laune chahide han te nal he pani nu bcha k assi es dhrti nu hor bimar hon to bcha skde ha.


                Rashpal Singh
            
       

कहानी (kahani) - वातावरण का दुश्मन - प्रदूषण | vatavarn ka dushman - pardushan

जब इंसानी शरीर को बिमारी लगती है और उसका इलाज समय पर ना हो, वो ला-ईलाज  बन जाती है । कुछ ऐसे ही दौर से हमारी धरती का वातावरण गुजर रहा है । जिसे प्रदूषण नाम की भयानक बिमारी लग चुकी है, अगर इसको समय रहते ठीक ना किया गया तो यह भी ला ईलाज बन जाएगी ।

       

              इंसान की लापरवाही के कारण आज धरती के अंगो हवा, पानी, मिट्टी को प्रदूषण की बिमारी हो चुकी है । जंगलो की कटाई ने बारिश चक्कर को ऐसे प्रभावित किया है जैसे बिमार शरीर मे खून का दौरा प्रभावित होता है । हरे भरे जंगलो की जगह सीमेंट के जंगलो ने ले ली है । फैक्ट्रियों 
मे से निकला जहर नदियों मे मिल रहा है और ये जहर पीने वाले पानी और मछलीओं के लिए बहुत हानिकारक है ।
                         कहानी - शम उम्मीद की

        कारो, मोटरसाइकिलो और फैक्ट्रियों मे से निकला धुंआ हवा प्रदूषण करता है और धरती के दम को ऐसे दबा रहा है जैसे अजगर अपने लपेटे मे लिए हुए शिकार का दम दबाता है । यह सब इंसान की हद से ज्यादा जरूरतो के कारण हो रहा है । जंगलो की कटाई और कुदरत के साथ छेड़खानी ने धरती की शारीरिक बनावट को बिगाड़ के रख दिया है ।
         
        आज ऐ सी, कारो, रेफ्रिजरेटरो का उपयोग बढ़  गया और इन मे से निकल रही जहरीली गैसें इंसान और जानवरो के साथ साथ धरती की चमड़ी को भी कैंसर का रोग दे रही है । इन गैंसो ने धरती के तापमान को बढ़ा दिया है जो ग्लेशियरो को पिघला रहा है।

      आज ऐसे हालात बन चुके है कि पीने वाला पानी भी पैसो से खरीदा जा रहा है । जिस जगह पर पानी ज्यादा है वहाँ बड़ी लापरवाही के साथ इसकी बरबादी की जा रही है।
पानी का स्तर खतरे के निशान तक कम हो चुका है। वो दिन दूर नही जब धरती के कुछ हिस्से रेगिस्तान मे बदल जाएगे ।

अगर जल्दी ही इसका इलाज ना किया गया तो इसके बुरे नतीजे हमारी आने वाली पीढ़ी को भुगतने पड़ सकते है ।इंसान को आज अपनी बढ़ती जरूरतो पर पाबंदी लगाने की जरूरत है । इसके लिए उसे कुछ जरूरी कदम उठाने पडे़गे।
वृक्षो की कटाई पर रोक लगा के और नए वृक्ष लगा के और पानी को बचा के हम इस धरती को बिमार होने से बचा सकते है ।

                                                रशपाल सिंह 

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कहीं तो मेहनत से बोए हुए,  खेतो के खेत डूब जाते है । और कहीं जमीन jameen पर यूं ही बिखरे हुए बीज भी उग आते है। कई तो सात जन्मों की कसमे...