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Tuesday, July 14, 2020

ईमानदार क्लर्क | Imandar Clerk | Kahani

आज रमेश का अपनी नौकरी पर पहला दिन था। वह अपने ही शहर के सरकारी विभाग  मे क्लर्क लग गया । उसे यह नौकरी पाने के लिए बड़ा संघर्ष करना पड़ा । बहुत सारे इम्तिहान पास करने के बाद और मेहनत के बाद आखिरकार रमेश सरकारी विभाग मे क्लर्क लग गया । इस नौकरी को लेकर उसके और उसके घरवालो के बहुत सारे सपने जुड़े हुए थे। रमेश ने सोच रखा था कि वह ईमानदारी से नौकरी करेगा और अपने घर की आर्थिक स्थिति को बेहतर करेगा । उसने सोच रखा था कि वह दफ्तर मे सबसे मिलजुल कर काम करेगा और बढि़या से बढि़या काम करने की कोशिश करेगा ।

     रमेश जब दफ्तर पहुंचा तो सबसे पहले उसने सब के साथ जान पहचान की, सभी ने एक हल्की मुस्कराहट के साथ उसका अभिवादन किया । दफ्तर के एक कर्मचारी ने रमेश को उसके बैठने का स्थान बताया और उसे काम समझाने लगा। रमेश कुर्सी पर बैठ कर बहुत खुश हुआ और उसे लगा कि जैसे  उसके सारे सपने पूरे हो गए हो। रमेश का कमरा अलग से था और उसका दरवाजा उपर से टूटा हुआ था । दफ्तर की हालत भी कुछ अच्छी नही थी। पहला दिन होने के कारण सब उसके पास आ रहे थे। उसके पास बैठकर बातें कर रहे थे।

           नीरज भी उसी दफ्तर मे काम करता था । दोपहर के समय जब रमेश अकेला बैठा काम कर रहा था तो नीरज रमेश के साथ आकर  बैठ गया । बातों ही बातों मे नीरज ने रमेश से कहा कि वह यहां बड़े ध्यान से काम करें क्योंकि यहां काम करने वाले लोग बड़े चालाक है। नीरज  के बाद दफ्तर के दो और कर्मचारी बारी बारी रमेश के पास आए उन्होंने भी रमेश से यही बात दोहराई । रमेश को यह बात बड़ी अटपटी लगी। अब रमेश को अपने दफ्तर का थोड़ा बहुत अंदाज़ा तो हो ही चुका था ।

         अगले दिन जब रमेश दफ्तर पहुंचा,  तो रमेश के वरिष्ठ अधिकारियों ने उसे काम के लिए बहुत सी फाइल पकड़ा दी। रमेश यह देखकर खुश हुआ कि उसे करने के लिए काम दिया जा रहा है। वह मन मे सोचने लगा कि वह अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेगा। धीरे-धीरे सब अधिकारी उसे काम देने लगे। रमेश खुश भी था और असमंजस मे भी था क्योंकि हर कोई अपने हिस्से का काम भी उसे सौंप जाता । रमेश जब भी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से काम कम देने को कहता तो सब उस पर चिल्लाने लग जाते। कोई ना कोई उसे कुछ ना कुछ कह जाता कभी उसके काम करने पर टिप्पणी तो कभी रमेश के स्वभाव पर टिप्पणी । अब रमेश समझ चुका था कि जानबूझकर उसका उत्पीड़न हो रहा है।

   यहां एक तरफ पूरे दफ्तर मे एक दूसरे पर बातें और एक दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ लगी रहती थी। वही दूसरी तरफ लोग अपना काम जल्दी करवाने के लिए रिश्वत भी दे जाते थे। रमेश एक अकेला ही अधिकारी था जो रिश्वत नही लेता था । इसी बात से पूरा दफ्तर रमेश से चिड़ा हुआ था।
नीरज एक दिन रमेश के कमरे मे गया, और कहने लगा कि इतने ईमानदार मत बनो जानबूझकर । ईमानदारी दिखा के कुछ फायदा नही है। अगर इतने ही ईमानदार हो तो अपनी तनख्वाह से अपने कमरे और  दरवाजे को तो ठीक करवा लो। यह सब बातें रमेश को बहुत चुभ रही थी।

    हर कोई रमेश के कमरे मे आंखे दिखाता हुआ आता और कुछ ना कुछ सुना जाता । कुछ दिनो तक तो रमेश सोचता ही रहा कि अब वो क्या करें। उसने एक दो बार असतीफा देने का भी सोच लिया था । लेकिन उसे लगा अगर वो डर कर असतीफा दे देगा तो क्या गारंटी है कि जो उसे अगली नौकरी मिलेगी वहा ऐसे लोग नही होंगे । एक  दिन उसने ठान लिया कि वह भी सब से अकड़ कर बात करेगा । अब सब हैरान से हो गए थे कि रमेश को क्या हो गया है। रमेश अब सिर्फ अपने हिस्से का काम करता था। वरिष्ठ अधिकारियो ने रमेश से कह कि वह रमेश के इस रवैये के बारे मे ऊपर शिकायत करेंगे । लेकिन रमेश ने भी  फट से जबाब दिया,  वह भी तुम्हारी रिशवत खौरी को सबके सामने उजागर करेगा । इतना सुनते ही सब अधिकारी घबरा गए ।

     एक  दिन रमेश ने अपना कमरा भी ठीक करवा लिया । रमेश ने भी जानबूझकर कमरे के दरवाजे की लम्बाई छोटी करवा दी। अब डब भी कोई रमेश के कमरे मे आता तो उसे सिर झुका कर आना पड़ता । दफ्तर के सभी अधिकारी रमेश की मंशा समझ चुके थे । अब सब रमेश को उसके हिस्से का ही काम देते और फालतू मे रमेश चिल्लाते भी नही थे। और तो और रमेश के कमरे मे दरवाजा छोटा होने के कारण अधिकारी कम जाने लगे थे।

Saturday, July 11, 2020

जुलफें शायरी | julfe shayari | lyrics

ये मस्त जुलफें और निगाहें
मीठी बातें और अदाएं
सब फरेब है
वक्त रहते इन्हे पहचान लो
इश्क मे मत पड़ना
यारों मेरी बात मान लो

पल पल रहेगा इंतजार intezar
तुमको उसके दीदार का,
और  हर पल रहेगा दिल बैचेन
ये बात जान लो

उड़ेगी पतंग, तुम्हारी जिंदगी की
इनकी मर्जी से
और इनके हाथो मे पतंग की
डोर रहेगी  ।
कहा हो, क्या कर रहे हो
ये सवाल करते करते
तुम्हारी आजादी के लिए मुसीबत बन जाएगी
अगर इस मुसीबत के लिए तैयार हो तुम
इन मुसीबतों के आगे सीना तान लो

अगर ना आएगी नींद nind इन्हे
चाहेगी सारी रात तुमसे चेट करना
और कही आ गई नींद तुम्हे
इनकी नींद से पहले
तो बोलेंगी
अब नही पसन्द तुम्हे मुझसे बात करना।
अगर कर सकते हो तुम भी
सारी सारी रात बातें
तो फोन में एक बड़ा रिचार्ज डाल लो।



बदलता इंसान | Badlta Insan | Shayari lyrics

सोच तो मैली है ही तेरी
हवा भी मैली कर दी ।
अब ना पेड़ संभालेंगा तू
बिना साफ हवा
और  नियत के
अपनी नसलें कब तक पालेगा तू।

दिलों मे है कड़वाहट
सिर्फ मतलब के लिए मीठी वाणी ।
एक दिन ढूंढे भी नही मिलेगा, 
गंदा कर दिया सारा पानी।
भर दिया है जहर पानी मे
तेरी आने वाली नसलें
यही जहर  पीएंगी।
अब तू ही सोच बंदे
बिन पानी के तेरी नसलें
कैसे जिऐंगी।

इतने तो गिरगिट भी रंग नही बदलता
जितने है, तू चेहरे बदलता
सामने से कुछ ओर
पीठ के पीछे तू ओर ही चलता है
करके बेजुबानो के घर को तबाह
अपना घर ना बचा पाएगा
तेरे इन पाप कर्मो का फल
जरूर
एक दिन तेरे सामने आएगा ।



किस्मत थी नाराज, हाथ भी खाली थे
तूफान मे उड़ी छतों ने बयां कर दिया,
अंदर से घर भी खाली थे



जिंदगी में मुसीबत आने पर अगर आप डगमगा जाएं
तो डरे मत।
क्योंकि पानी मे पड़ रही सूरज की परछाई भी
पानी हिलने से डगमगा जाती है।



खुदा भी इसकी दुआएं कभी रद्द नही करता,
औलाद के लिए ही इसकी हर एक मन्नत होती है।
औलाद के लिए हर दुख हस के सह जाती है,
ऐसे ही नही कहते
कि " मां " के पैरों मे जन्नत होती है



पता नही , हो या नही मेरी तकदीर में
ठहर जाओ!
कैद कर लूं , तुम्हे तस्वीर में



बूढ़े होने से डरना मत
नसीब वाले है
जिन्हें बुढ़ापा आता है।



अगर आप अपने काम की सही कदर नही करते तो आपका काम सही नही होगा, क्योंकि अपने काम का सच्चा कदरदान इंसान खुद होता है।



मोहब्बत चीज क्या है? Mohhbat cheez kya hai?

 महबूब के दूर जाने के बाद
दिल dil मे उठती टीस क्या है
समंदर से भी गहरा राज है
मोहब्बत चीज क्या है?

कई तो मिल के भी अधूरे है
कई दूर दूर रहकर भी पूरे है
पता है लहरों को बिखर जाएंगी
फिर किनारो से टकराने की बैचेनी क्यों है?

किस्मत kismat वालो का तो हो जाता है सफर मुकम्मल
कुछ तो हमसफ़र रास्ते मे ही खो देते है
जो मिल नही सकते दो दिल इस जहान मे
तो उस जहान मे उनकी मंजिल क्या है?

महकती तो मिट्टी भी है बारिश में
बस महसूस करना आना चाहिए
प्यार तो अंदर की सादगी से होता है
फिर बाहर चमक दमक का शोर क्यों है।

पहुंच से बहुत दूर है ये चांद
रात मे दिखता है और दिन मे आलोप
कौन सा बेदाग है चांद
फिर चांद chand को गीत, गजलों और शायरी
मे लिखने की मजबूरी क्या है।




#Ishaq

ऐ दिल इश्क तुझे है उसके साथ
पर उसे तो नही,
फिर इजहार करके क्या करना ।
जिस राह पर अपना कोई है ही नही,
उस राह के बारे मे पूछ के क्या करना।

Thursday, July 9, 2020

शाम की सैर | sham ki sair

मैं हर रोज शाम को सैर करने जाता । थोड़ी ही दूर  रास्ते के किनारे एक छोटा सा घर है जिसके सभी लोग शाम को बाहर चारपाई लगा कर बैठे रहते है । बाहर से ही देखने पर उनके घर का पता चल जाता है । उनके घर मे दो छोटे छोटे कमरे है और बाहर की तरफ थोड़ी सी खुली जगह है जिसके ऊपर छत नही है। घर का नक्शा ऐसा है कि हवा आर पार होती रहे । घर के चारो तरफ हरे भरे खेत और पेड पौधे है।

जब भी कोई सैर करने वाला उनके घर के पास से गुजरता तो उनके घर की तरफ जरूर देखता। जितने भी  लोग वहां सैर करने आते सारे आस पास के इलाके से ही सम्बंधित है ।
एक दिन उस घर के सामने उसी घर का बड़ा बुजुर्ग बैठा हुआ था । तो मैंने रूक कर उनका हाल चाल पूछ लिया । बातों ही बातो मे मैने उन से पूछा के उनका घर चलाने के लिए क्या काम करते है तो उन्होंने बताया कि हम सब मजदूरी का काम करते है। थोड़ी बहुत बात करने के बाद मे आगे की तरफ चल दिया ।

      हमारे मुहल्ले मे सभी घर तकरीबन एक जैसे ही बने हुए है। सारे मध्यम वर्गीय परिवार ही रहते है। सभी घर अंदर और बाहर से देखने मे बेहद खूबसूरत । और हो भी क्यों ना सभी ने अपनी कड़ी मेहनत से और खून पसीने की कमाई से घर बनाए। तो घरों का नक्शा इस तरह है सबसे पहले आता है एक बड़ा सा गेट । उसके बाद इतनी जगह के कार, मोटर साइकिल और अन्य व्हीकल खड़े हो सके। यह सब व्हीकल खड़े करने के बाद अगर जगह बच जाए तो ठीक नही तो केवल घर के मेन गेट से कमरे के दरवाजे तक गुजरने के लिए ही जगह बचती है।

उस बरामदे को जिस के चारो तरफ दीवारे है और ऊपर छत है। अगर बाहर की तरफ देखना हो तो मैन गेट से बाहर जाना पडे। बरामदे के एक तरफ आता है मेहमानो के लिए कमरा ओर उसके बाद लाबी , दो कमरे,  एक रसोई घर। पीछे की तरफ शौचालय और स्नान घर बने हुए । हमारे मुहल्ले मे सभी घर चारो तरफ से बंद है मानो जैसे एक बंद डिब्बा । अगर हमे ताजी हवा मे घूमना हो या फिर बारिश का मजा लेना हो तो हमे या तो बाहर गली मे जाना पडता है या फिर छत पर जाना पडता है।

             हमारे मुहल्ले मे सभी की शिकायत रहती है कि घर के आगे और पीछे की तरफ आंगन होना चाहिए , ताकि बच्चे खेल कूद सके। हमारे पडोसी का तो इतना बड़ा घर है फिर भी वो कहता है कि ऊपर दो कमरे ओर बनाने है। मुहल्ले मे कई लोगो को तो अपने घरो के नक्शे ही नही पसन्द। एक ओर मजेदार मुहल्ले मे 8 10 ऐसे भी है जो बहुत ही ज्यादा बड़े, महल जैसे । पर उनमे दो दो जन ही रहते है।

एक दिन जब मे सैर करने गया । उस छोटे से घर के जो रास्ते मे आता है , के सभी लोग घर के बाहर बैठे हुए थे ।
अंकल ने मुझे रोक लिया और हाल चाल पूछने लगे। वहां पर आंटी भी बैठी थी तो उन्होंने मुझे से पूछ लिया कि तुम्हारा किस तरफ है । मैंने बताया कि पीछे की तरफ है । तो आंटी बोलने लगी " अरे वाह! वहां तो घर ही बड़े सुन्दर है । बड़े बड़े ओर पूरे बंद । ना अंदर बारिश जाने का डर, ना ज्यादा
धूप जाने का डर । हमारा घर देखो तेज धूप पड़ती है। बरामदे मे बारिश का पानी खड़ा हो जाता है । बच्चे सारा दिन मिट्टी मे खेलते रहते है।" आंटी की इन बातो ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया।

इंसान के पास कम हो या ज्यादा,  इंसान कभी भी किसी भी चीज से जल्दी संतुष्ट नही हो सकता ।

बेरोजगारी एक बिमारी | Berozgari Ek Bimari

बेरोजगारी समाज मे एक बहुत भयानक बिमारी है। यह किसी भी देश को अंदर ही अंदर से खोखला कर देती है। बेरोजगारी के अनेको कारण हो सकते है। बेरोजगारी दर सत् प्रतिशत तो कभी मिटती नही। अगर यह एक निश्चित दर से आगे बढ़ जाए तो गम्भीर समस्या बन जाती है। हमारे देश मे करोड़ो लोग ऐसे है जिनका गुजारा एक निश्चित आमदन से होता है। यह निश्चित आमदन किसी भी तरीके की हो सकती है जैसे फैक्टरी मे मजदूरी करना आदि ।

  इसी से संबंधित छोटी सी कहानी मे आपको सुनाने जा रहा हू। सोहन जो कि दसवीं पास है। गरीब होने के कारण वह आगे पढ़ ना सका। उसके पिता जी गांव के पास वाले शहर मे मजदूरी का काम करते है। सोहन भी उसी फैक्टरी मे काम करने लगा। मजबूरी देखिए, दसवीं पास होने पर भी उसे फैक्टरी मे मजदूरी का काम करना पढ़ रहा है। उसे और कही अपनी योग्यता के अनुसार नौकरी नही मिली तो उस ने घर चलाने के लिए मजबूरी मे यह काम कर लिया ।

दोनो बाप और बेटा एक ही फैक्टरी मे काम करते थे। दोनो के काम करते हुए भी घर का गुजारा बड़ी मुश्किल से चल रहा है। क्योंकि घर मे और भी दो छोटे भाई बहन रहते है। वह दोनो पढ़ रहे है। आजकल हर चीज महंगी हो गई है। पढ़ाई से लेकर खाने पीने की वस्तुओ सब महंगी हो चुकी है। अगर घर मे कोई बिमारी हो जाए तो उसके इलाज का खर्च अलग से। इतनी महंगाई मे दोनो की कमाई से भी घर चलाना मुश्किल हो रहा था।

मुश्किल से ही सही उस फैक्टरी से उनके परिवार का पालन पोषण चल रहा था। दोनो उस फैक्टरी मे बढ़ी मेहनत से कमाई कर रहे है। एक दिन अचानक उस फैक्टरी से सारे मजदूरो और अन्य कर्मचारियो को छुट्टी दे दी गई। सभी कर्मचारी और मजदूर हैरान थे। पूछने पर फैक्टरी के मालिक ने कहा कि पीछे से कच्चा माल नही आ रहा तब तक फैक्टरी बंद रहेगी। सोहन और उसके पिता के लिए तो अब और मुश्किल हो गया था।

   कई दिन बीत गए थे लेकिन अभी तक वो फैक्टरी नही खुली। सभी कर्मचारी और मजदूर समझ गए थे कि अब यह फैक्टरी नही खुलने वाली। हजारो परिवारो का पालन पोषण  अब बहुत मुश्किल से चलने वाला था। दूसरी कोई नौकरी ढूंढना भी बड़ी मुश्किल था। सोहन और उसके पिता को घर पर बैठे हुए एक महीने से ऊपर हो गया था। अब उन्हे घर खर्च चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ा। ऐसे ही बहुत सारे मजदूरो को भी कर्ज लेना पड़ा ।

इस कहानी से यह तथ्य निकल कर सामने आता है कि बेरोजगारी कैसे समाज के ढांचे को प्रभावित करती है। परिवार के किसी एक सदस्य को रोजगार मिलने से उस परिवार का पालन पोषण हो जाता है। अगर उसी सदस्य का रोजगार चला जाए और वह दो तीन महीने के लिए घर पर बैठ जाए तो गुजारा बहुत मुश्किल से चलता है। वह परिवार कर्ज के नीचे दब जाता है और उससे बाहर निकलना बढ़ी मुश्किल होता है।

कर्ज के इलावा समाज मे और भी बुराईयां फैल जाती है। जैसे अगर कोई व्यक्ति अधिक देर तक बेरोजगार रह जाए तो वह बुरी संगति मे फंस जाता है। वह पैसे कमाने के लिए गलत साधनो का प्रयोग करने लग जाता है। जैसे चोरी करना, जुआ खेलना और लोगो को धोखा देकर पेसै ठगना। इन सभी चीजों से आमदन तो होती नही ,व्यक्ति मुसाबित मे फंस जाता है ।


Monday, June 29, 2020

नींबू पानी | Nimbu Pani | Hindi Story

अनमोल ने पानी निकालने के लिए फ्रिज का दरवाजा खोला, पानी की बोतल उठाते ही अचानक से उसकी नजर फ्रिज मे पड़े लिफाफे की तरफ गई । अनमोल पहले तो लिफाफे को देख कर खुश हुआ उसे लगा कि लिफाफे मे जरूर कुछ ना कुछ तो खाने के लिए है, जो अब तक उसकी नजरो से बचा रहा । जैसे ही उसने लिफाफे को खोला, बदबू के मारे उसने अपने नाक को दबा लिया । अनमोल जोर जोर से अपनी दादी और मां को आवाज देने लगा।

       अनमोल की दादी, जिसकी उम्र लगभग 70 साल होने को है, धीरे-धीरे चलकर अनमोल के पास आती है। उधर अनमोल की मां भी अनमोल की जोरदार आवाज सुनकर भागी चली आती है । अनमोल अपनी दादी से पूछता है कि इस लिफाफे मे ऐसा क्या है जो इतनी बदबू आ रही है । दादी बड़े ध्यान से लिफाफे के अन्दर पड़ी चीज को देखती है। वह चीज ऐसे लग रही है जैसे पानी मे मास के टुकड़े सड गए हो, जब ऐसा दादी ने बोला तो अनमोल की मां डर से कांपने लगी। अनमोल की मां डरी, सहमी हुई बोली कि " हमारे घर पर किसी ने टोना कर दिया है।"

   ऐसा सुनते ही दादी भी होश खो बैठती है। वह सोचने लग जाती है कि कौन उनका घर को बर्बाद करने पर तुला हुआ है। अब सारा परिवार सोच और चिंता मे डूब जाता है कि कौन उनके घर यह सब रख गया । घर मे सदस्यों की बहस अलग से होने लग गई । अनमोल के पिता को भी जब यह बात पता चली तो वह अनमोल की दादी और मां को बोलने लग गए " घर मे इतना सब कुछ हो गया ओर तुम सब कहा थे। ऐसे तो हमारे घर मे कोई भी आ सकता है । तुम्हारे नाक के नीचे से घर मे कोई घुस गया और ये सब रख गया ।"

      पूरे घर मे सहम और डर का माहौल बन गया । अनमोल तो यह बात सुनकर पूरी तरह से डर चुका था। अब वह फ्रिज के पास जाने से भी डरने लगा । घर मे इसकी चिंता के कारण लड़ाई और कलेश रहने लगा। अनमोल की दादी बैठे बैठे सोचती रहती कि कहीं उनके पड़ोसियों ने तो नही ऐसा किया । दादी अनमोल की मां से भी यही कहती क्या पता हमारे आसपास पड़ोस मे से ही किसी ने ऐसा काम किया हो। अनमोल की मां भी कहती है कि " हां, जरुर मोहल्ले मे से ही किसी ने ऐसा काम किया है। हमारे तरक्की किसी से देखी नही जा रही । " अनमोल की मां दादी से आगे कहती है कि " इनका व्यापार भी तो बड़ गया है। बस लोगों से यही नही देखा जा रहा । लोग हमारी खुशी देखकर खुश नही है ।"

      अनमोल की मां ने यह सब अपने मायके वालो और करीबी लोगों को बताया तो सब उन्हें कोई ना कोई सलाह देने लगे । किसी ने कहा कि इस बाबा के पास जाओ वो जरूर सब कुछ बता देगा और इस तरह सभी अपनी अपनी सलाह देने लग गए । धीरे-धीरे सारे मुहल्ले मे भी यही बात फैल गई । अब सभी अनमोल की मां के सामने किसी ना किसी का नाम ले देते कि फलाने बंदे ने यह काम किया होगा । डर के मारे सारे परिवार का मन अब काम मे नही लगता था। जिस कारण सारे काम रूक से गए थे। डर के कारण अनमोल का भी पढ़ाई मे मन नही लगता था ।

       एक दिन घर मे डर का माहौल ज्यादा बढ़ गया, जब अनमोल के पिता ने घर के दरवाजे पर एक रोटी देखी। अनमोल की मां ने जब यह सब देखा तो पहले वह डर गई,  बाद मे वह गुस्से से लाल हो गई । अनमोल की मां गुस्से से घर के बाहर आई और गली मे खड़ी होकर ऊंची आवाज मे आस पड़ोस वालो को सुनाने लगी, " किस को हमारी खुशिया और तरक्की पसन्द नही, जिसने भी यह सब किया है वह किसी को भी छोडेंगी नहीं।" इस तरह अनमोल की मां 10 15 मिनट तक गुस्से मे सब को बोलती रही। अनमोल का पिता उसे शान्त करके घर के अन्दर ले आया।

      अनमोल का पिता शाम को काम से घर वापस आया। गर्मी के दिन थे। उसने अनमोल की मां से कहा कि एक दिन वो नींबू लेकर आया था तो जरा उसे एक गिलास नींबू पानी बना दें। अनमोल की मां फ्रिज मे से नींबू निकालने गई पर उसे कहीं भी नींबू नजर नही आए। अनमोल की मां को याद आया कि वह वहीं नींबू थे जिसे वह मास के टुकड़े समझ रहे थे। वह नींबू फ्रिज मे अधिक देर तक पड़े रहने के कारण गल गए थे और वह मास के टुकड़ो की तरह दिखाई देने लग गए थे। अनमोल की मां ने यह सब अपने परिवार को बताया । तो सब का डर दूर होने लगा।

      अगले दिन अनमोल का पिता सुबह जल्दी उठकर बाहर सैर करने लगा । उसने क्या देखा एक कुत्ता अपने मुँह मे एक रोटी लेकर आता है और उनके घर के दरवाजे के पास बैठकर खाने लग जाता है। दरअसल यह कुत्ता ही हर रोज एक रोटी दरवाजे के पास छोड़ जाता था । जिसे अनमोल के  पिता  वहम के कारण कोई टोना समझ बैठे थे । इस तरह पूरे परिवार के वहम का अन्त हो जाता है ।



बुजुर्गो का प्यार | Buzrgo ka Pyar | Hindi Kahani

सभी बच्चो को अपने दादा-दादी से बहुत प्यार होता है। यह प्यार तब और भी बढ़ जाता है अगर दादा-दादी बच्चो से दूर किसी गांव मे रहते हो। छुट्टियों मे दादा-दादी के घर जाने पर एक अलग ही खुशी और प्यार का अहसास होता है। वहाँ आसपास के घरों मे जाना और अपने जैसे बच्चो के साथ खेलना बच्चो को बहुत अच्छा लगता है। मैं और परिवार भी अक्सर छुट्टियों मे अपने दादा-दादी के घर जाया करते थे ।

     जब भी जून के महीने मे छुट्टियां होती। हम दादा-दादी के पास जाने को तैयार हो जाते। हम बस से अपने गांव जाते। यह सफर भी हमे रोमांचक लगता। रास्ते मे हरे भरे खेत और   पेड़ देखकर हमे अलग ही खुशी महसूस होती। बस जब भी किसी बस स्टॉप पर रूकती तो मै और मेरी बहन कुछ ना कुछ खाने को ले लेते। जब बस गांव पहुंचती थी तो वहाँ के बस स्टैंड पर दादा जी हमे लेने आ जाते थे।

घर जाते ही दादा-दादी हमें बहुत प्यार करते और खाने के लिए बहुत कुछ देते। हम जाते ही खेलने लग जाते। आसपास के बच्चे भी हमारे ही घर आ जाते। वह समय बहुत अच्छा था। गांव मे लोग मिलजुल कर रहते थे। एक दूसरे के घर आना जाना लगा ही रहता था। गांव मे सब लोग  त्योहार भी मिलजुल कर मनाते थे। पर अब गांव पर आधुनिकता का असर दिखाई देने लग पड़ा है। लोग अपने काम से काम रखने लगे है। लोगो का एक दूसरो के घर आना जाना भी कम हो गया है।

        हम भी अपने गांव मे अपने पड़ोसियो के घर खेलने चले जाया करते थे। उनके भी यहां हमारे जैसे छोटे छोटे बच्चे थे। हमे उनके साथ खेलना बहुत पसन्द था। वह गांव के सरपंच का भी घर था। उनका घर बहुत बड़ा था। उनका आंगन भी बहुत बड़ा था। यहा हम बहुत सारी खेल खेलते थे। सारा दिन उस आंगन मे मिट्टी के घर बनाते रहते थे। कभी कभी हम कंचे भी खेला करते थे। हमारे पड़ोसी भी हमे बहुत प्यार करते थे। वह भी हमे खाने के लिए बहुत कुछ दिया करते थे। इसी तरह से सारा दिन खेल कूद मे कब निकल जाता था पता ही नही चलता था।

         जैसे जैसे स्कूल जाने के दिन नजदीक आते चले गए हमारे मन मे उदासी आने लगती थी। हमारे दादा जी को हमारे उदास चेहरे पसंद नही आते थे। फिर वो हमे बहुत सारे खिलौने और नए कपड़े ला कर दिया करते थे। दादा जी हमे बड़े प्यार से समझाते थे कि जैसे जीवन मे खेल कूद और आनंद जरूरी है वैसे ही पढ़ाई करना भी बहुत जरूरी है। जब तुम यहा से चले जाओगे तो खूब पढ़ लिख कर अच्छे इंसान बनना। कुछ ही दिनो बाद हम घर आ गए।

  हमने स्कूल जाना शुरू कर दिया था। पहले चार पांच दिन तो हमारा मन नही लगा। गांव की बढ़ी याद आती थी। पर फिर दादा दादी की कही बातें याद आई। हम मन लगाकर पढ़ने लग गए। ऐसे ही पढ़ाई मे सालों-साल गुजरते चले गए । हम बीच बीच मे थोड़े दिन के लिए गांव जाया करते थे।

हमारी पढ़ाई पूरी हो चुकी थी। हम अच्छी सरकारी नौकरी पर भी लग गए थे। दादा-दादी अब इस दुनिया मे नही रहे थे। अब हम जब गाँव गए तो गांव मे बहुत ज्यादा बदलाव आ चुका था। मैं जिन पड़ोसियो के घर खेलने जाया करता था वह भी शहर मे रहने के लिए चले गए थे। गांवे अब लोग एक दूसरे के घर भी नही जाते थे। समय के साथ सब बदल चुका था ।


Monday, June 15, 2020

एहसास | Ehsas | Heart Broken Shayari

पूछा उसने
बन गया मजाक मेरे प्यार का
या अब भी कोई कसर बाकी है?

क्या बताओ अब उसको
तेरे दूर जाने के बाद
तेरे पास होने का,
 एहसास हो गया है ।
और जिंदगी तो जैसे ,
अब एक बोझ सा हो गया है ।

उठती है टीस मेरे दिल मे
तेरे इन कहे हुए
आखिरी शब्दो से
कि जो होना था, वो तो हो गया
लेकिन अब  मेरे दिल का जख्म
भी नासूर सा हो गया ।

        Written by Rashpal Singh



शतरंज | Shatranj | Best Motivational Poetry

ये दुनिया ना शतरंज सी हो गई है
यहां शह और मात का खेल चलता ही रहता है
तुम भी अपनी अगली चाल सोच के रखना
क्योंकि यहां
पहले गले मिलते है
फिर,  पीठ पर छुरे चलते है

बेशक तुम अपनी मंजिलो की तरफ उड़ो
पर अपने पंखो का ध्यान रखना
अगर किसी को भनक भी हो गई ना
कि तुम तरक्की की ओर उड़ रहे हो
तो ये वो दुनिया है
यहां पैर पैर पर पर काटने वाले मिलते है।

लोग ना सीने मे नफरत की आग लिए घूम रहे है
और जिन्हे तुम अपना अपना कहते हो
जरा इनसे अपना घर बचा के रखना
क्योंकि इन्ही अपनो मे
घर जलाने वाले भी मिलते है।

               Written by - Rashpal Singh



अपनी वाणी पर ज्ञान की लगाम डाल लो,
फिर चाहे सारी दुनिया गुलाम कर लो।



वाह रे ! प्यार
गुलामी मुझे उसकी करनी है
लेकिन कैद वो है दिल मे मेरे ....




बेखबर | Bekhabar

तू जान बूझकर
बेखबर रह मेरी मोहब्बत से
अगर
मैंने तिनका तिनका
तेरे दिल की रिहासत का
तो मुझे इश्क का तुफान कौन कहेगा ।



ख्वाब | khwab

मैं जब भी,  ख्वाबों के पीछे भागा
तो दुनिया बोल उठी,
ऐसा मत करो
तुम्हारे इरादे नाकामयाब होंगे ।
मगर
मैंने भी जिद्द पकड़े रखी
और लिखना शुरू कर दिया
ऐ दुनिया वालो
अब बोलो क्या सलाह दोगे।



बेवफाई  | Bewafayi | Shayari ghazal

हम से दूरियां
गैरों से हस हस के बातें
और मुझसे खेल रुसवाई का
करके खुद ही खता
वो बेवफा ...
कारण मुझसे पूछने आई,
बेवफाई का।

बड़ी आसानी से कर गई
वो मेरे अरमानो का सौदा
और
करके मुझसे धोखा
वो बेईमान ..
कारण मुझसे पूछने आई,
बेईमानी का ।

तोड़ दिया उसने वादा जो
किया था साथ निभाने का
और  करके तन्हा भीड मे मुझे
जालिम ...
कारण मुझसे पूछने आई,
तन्हाई का।



चेहरे से क्या खाक पढ़ोगे
चोट तो दिल पे खाई है
अब गम तो इस बात का है
साहब
कि गम छुपाने की अदाकारी भी
उसी ने सिखाई है।



इश्क को पलने दो अपने अंदर
आखिर प्यार का लावा कब तक संभालेंगा दिल के ज्वालामुखी से



देखते रहो बस
कुछ बोलो मत
ये इश्क है जनाब
खुद ही बोलेगा।



मिटा डालो मे उस शाम को
मजबूर कर दिया था जिसने तब
ऐसी उलझन मे डाल दिया था मुझको
आखिरी लफ्ज बोला था मैंने तुमसे जब



मशहूर होने के दो तरीके साहब
बुरे बन कर,  लोगों की आंखो मे खटकते रहो
या
अच्छे बन कर, लोगों के दिलों मे बसते रहो।



ए दिल प्यार फिर से हो रहा है तुझे
पर इस बार धोखा नही खाऊँगा मैं
कर ना दे, तू मुझे फिर से बर्बाद इसलिए
तेरे एरिया मे लाकडाऊन लगाऊंगा मैं।



मिलता है आसानी से इसलिए बेकदर कर दिया ।
कीमत पता है जिन्हे पानी की, उन्होंने कंधे पर धर लिया ।



एक बात जान लेना, बहुत अहम है तेरा
ये जो तू बार बार सोचता है
ना कुछ नही कर सकती मै, वहम है तेरा 

Friday, June 12, 2020

स्कूल के किस्से | School k kisse | Hindi shayari on school time

सुबह देर से उठकर मेरा नहाना था
सिर दर्द, बुखार और पेट दर्द
रोज का मेरा बहाना था
लेकिन वो साईकिल,  स्कूल बस और दोस्तों की टोलियां
मेरी खुशी के हिस्से थे
आज, सुनाओ तुम सबको
मेरे स्कूल मे क्या क्या किस्से थे।

चलते लेक्चर मे, बेग खोलकर टिफिन मुझ को खाना था
बिना मतलब की बातों पर हंसना और हंसाना था
वो एक दूसरे पर चाक फेंकना
बेइज्जती करना, गर्दन पर थप्पड़ लगाना
सबकी खुशी के हिस्से थे
आज, सुनाओ तुम सबको
मेरे स्कूल मे क्या क्या किस्से थे।

रटटे बहुत लगाए हमने, पर पल्ले कुछ ना पड़ा हमको
टीचर ने सजा दी बहुत,  पर असर कुछ ना हुआ हमको
लेकिन इम्तिहान मे पर्ची बना कर
जूतों, टाई और पैन मे छिपाना
हमारी कला के हिस्से थे
आज, सुनाओ तुम सबको
मेरे स्कूल मे क्या क्या किस्से थे।

आधी छुट्टी का रहता था इंतजार हम सबको
अपने अपने चांद को निहारने साथ वाली क्लास जाना था सबको,
वो प्यार की आंख मिचौली, रास्ते मे इंतजार और लव लेटर
हमारे आशिकी के हिस्से थे
आज, सुनाओ तुम सबको
मेरे स्कूल मे क्या क्या किस्से थे।
             
                     Written by - Rashpal Singh




Tu Jab Se Milli Hai | Shayari | तू जब से मिली है

तू जब से मिली है,
तूने ..
 सिखा दिया है  तन्हाई मे भी मुस्कुराना।
यूं ही नही मेरे चेहरे पर रौनक रहती अब,
वजह है...
तेरी दिलकश अदाएं , वो तेरा शरमा नज़रे झुकाना।

जैसे अब तक साथ निभाया
मैंने ..
सारी जिंदगी तेरे संग है साथ निभाना
यूं ही नही,  ये दिवानापन मेरे अंदर
वजह है...
तेरी दिलकश अदाएं , वो तेरा शरमा नज़रे झुकाना।

मेरे दिल की हर धड़कन अब तेरा ही नाम लेगी
ये मेरे दिल ने है माना ..
यूं ही नही तुझे देखकर  मेरा दिल नाच उठता अब
वजह है...
तेरी दिलकश अदाएं , वो तेरा शरमा नज़रे झुकाना।

की है जादूगरी तुमने बहारों पर भी,
फूलों का चमन भी हो गया है तेरा दीवाना
यूं ही नही मदहोश रहती ये हवाएं जहा से तू गुजरती है अब
वजह है...
तेरी दिलकश अदाएं , वो तेरा शरमा नज़रे झुकाना।
                         
                        Written by - Rashpal Singh



Khoobsurati |Shayari

हम विचारों को छोड़ जब खूबसूरती का अंदाजा लिबास से लगाने लग जाते है,
तो हमें बनाने वाली कायनात भी शर्मिंदा हो उठती है।
             
                        Written by - Rashpal Singh



अगर सफलता चाहिए,
तो खुद को माहौल के रंग मे मत रंगो,
उल्टा माहौल को अपने रंग मे रंगो।

                      Written by - Rashpal Singh



तेरा हाथ थामा है आज से
तुझसे वफा निभाओंगा ये वादा है मेरा
और तू भी चलना जिंदगी भर साथ मेरे
अब से तेरे बिना जीवन आधा है मेरा।

                      Written by - Rashpal Singh



प्रयास | Pryas | shayari

लाख बहाने बनाता है।
और मुश्किल राहों से डरता है।
बिना प्रयास किए फिर,
फल की उम्मीद क्यों करता है।

                     Written by - Rashpal Singh



चूल्हा |Chulha | Hindi kavita

चाहता हू मैं, मेरे घर का चूल्हा जलता रहे..
दुनिया की हर खुशी से मेरे घर का आंगन भरता रहे।
अपने परिवार के अरमानो के लिए,
मैने अपने हर एक अरमान को तोड़ा है,
यूं ही नही मैंने अपने घर को छोड़ा है।

                          Written by - Rashpal Singh



लिखने दे | likhne de | Best hindi shayari

लिखने दे शायरी तुझ पे
हर पल हर घड़ी ।
अगर ऊंचाईयां ना सही तो,
कौन सा मौत की खाई मे धक्का दे रही है तू।
अगर दोनो का प्यार ना बन सका
कम से कम ,
शायरी लिखने के लिए तन्हाई तो दे रही है तू।

                   Written by - Rashpal Singh



मोहब्बत या शक | Mohhabat ja shak

अच्छा क्यों नही लगता तुझे, मेरे लबों से किसी दूसरे का जिक्र करना ।
ये मोहब्बत है या शक ... !
तेरा बात बात पर मेरा यूं फिक्र करना।

                   Written by - Rashpal Singh



बदले अंदाज | Badle Andaz | Top Shayari

पहले था प्यार उनकी आंखो मे
लेकिन अब
अक्षो के बदले अंदाज नजर आते है।

                  Written by - Rashpal Singh




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Saturday, June 6, 2020

20 रुपये का नोट || Hindi Short Story || 20 Rupye ka note


पूरे गाँव मे बकरियां सिर्फ एक ही शख्स के पास थी, वो था लखू। लखू एक गरीब अनपढ़ परिवार से संबंधित था और लखू खुद भी अनपढ़ था। बस उसकी इसी अनपढ़ता का फायदा सारा गांव उठाता । पर वही कुछ ऐसे लोग भी थे, जिन्हे उसकी इस हालत पर दया आ जाती । लखू सारा दिन धूप छाओ मे बकरियां चराता रहता । लखू बकरियों का ध्यान बखूबी रखता ।

           अनपढ़ होने के कारण लखू को हिसाब-किताब करने मे बहुत परेशानी रहती थी । पर लखू इस बात को ज्यादा गंभीरता से नही लेता था। लखू की एक विशेष बात थी, उसे नए नोट बहुत पसंद थे। वही गांव वाले अक्सर बकरी के दूध के हिसाब मे उसे 10 20 रूपए कम ही देते। जिस रास्ते से लखू बकरियां चराने के लिए जाया करता था,  वही रास्ते मे एक दुकान पड़ती । वहां पर लोग बैठे रहते। वह लखू को आते जाते छेड़ते रहते और उसकी अनपढ़ता का मजाक भी उड़ाते।

      गांव का एक पढ़ा लिखा आदमी राजू भी उस दुकान पर बैठा रहता । वह अक्सर ही लखू से बकरी का दूध खरीदता  और सभी लोगों की तरह दस बीस रुपए कम ही देता । एक दिन लखू अपनी  बकरियां लेकर दुकान के सामने से गुजर रहा था । राजू ने लखू को रोक लिया,  और साठ रूपये का बकरी का दूध देने को कहा। उस समय बीस रुपए के नए नोट आए ही थे और गांव मे दो तीन जन के पास ही ये नए बीस के नोट थे।

      लखू ने राजू से बोला कि आज तो उसे बीस के नए नोट चाहिए । राजू ने जल्दी से अपनी जेब से दो बीस के नए नोट निकाले और लखू को देते हुए कहा, " लो लखू भैया, बड़े किस्मत वाले हो। जो बीस के नए नोट रखने को मिल गए। संभाल कर रखना इनकी कीमत तो सौ के नोट से भी ज्यादा है।" यह सुनकर पास बैठे लोग ठहाके मारकर हंसने लगे । उनमे से एक ने राजू की बात को आगे बढाते हुए कहा, " लखू रख लो ये अनमोल बीस के नोट ।" इतना कहकर फिर से ठहाके लगा कर हंसने लगे । लखू तो बस बीस के नए नोट देखकर खुश था, उसे यह नही पता था कि राजू ने उसे बीस रुपए कम दिए। लखू बीस के नोटों को खुशी से निहारते हुए वहां से चला गया ।


    गांव मे लखू को मूर्ख बनाने वाले लोग तो बहुत थे वही कुछ लोग लखू का अच्छा भी चाहते थे। उन्ही मे से लखू की चाची थी। चाची से लखू की यह हालत देखी नही जाती थी। कुछ दिनो बाद चाची लखू के लिए एक आठ कक्षा पढ़ी हुई लडकी का रिश्ता ले आई । उसके कुछ  दिनो बाद लखू की शादी भी हो गई ।   लखू की घरवाली रमा थोड़ा पढ़ी लिखी होने के कारण उसे पैसे का हिसाब किताब आता था। उसने देखा कि गांव के लोग उसे किस तरह बेवकूफ बना के बकरी के दूध के लिए कम पैसे दे रहे है।

    एक दिन उसने लखू से यह सब बातें कही तो लखू ने रमा से कहा कि अब से वह घर से ही बकरी का दूध बेचेगा, और रमा पैसे का हिसाब-किताब देखेगी। कुछ ही दिनो बाद बरसाते होने लगी । ज्यादा बारिश के चलते पूरे गांव डेंगू फैल गया। लोग मे हाहाकार मच गई । वही डाक्टरों ने लोगो को बकरी का दूध अधिक से अधिक पीने की सलाह दी। राजू जो लखू को सबसे अधिक लूटा करता था उसे भी डेंगू हो गया था ।

   डाक्टरी सलाह के मुताबिक उसने बकरी का दूध पीने की सोची । डेंगू के कारण दूध के भाव असमान छूने लगे थे। राजू बकरी का दूध लेने के लिए लखू के घर गया । राजू ने लखू से सौ रुपए का दूध देने के लिए कहा और हमेशा की तरह लखू को बीस रुपए कम दे दिए। पर लखू ने इस बार पैसे अपनी पत्नी रमा को दे दिए । रमा ने पैसे गिने तो उसमे से बीस रुपए कम थे। रमा ने राजू को आंखे दिखाते हुए कहा कि "बीस रुपए कम है , बीस रुपए ओर दो। अब ये दस बीस की लूटपाट नही चलेगी ।" इतना सुनते ही राजू शर्मिंदा सा हो गया । उसने अपनी जेब से बीस का नोट निकाला और लखू को नोट  देकर वहा से चला गया ।

  
                      Written by - Rashpal Singh


गांव छोड़ने की मजबूरी ।। Hindi Story || Gao Choddne ki Majbori

90 के दशक मे अरब देशो मे कंस्ट्रक्शन का काम इतना बढ़ गया कि अरब देशो को मजदूर बाहर के देशो से मंगवाने पड़े। इस का असर भारतीय उपमहाद्वीप पर ज्यादा पड़ा। लोग ज्यादा पैसा कमाने के लिए अरब देशो की और चल पड़े। इन लोगो मे गरीब मजदूरो की संख्या ज्यादा थी। अपने देशो मे कम मजदूरी मिलने के कारण उन्हे काम के लिए बाहर देशो मे जाना पड़ा। लेकिन यह कोई पक्का रोजगार ना था।

 मैं भी एक गांव मे पैदा हुआ हो। मेरा जन्म 1985 मे हुआ था। उस समय मे मेरे गांवे खेती का काम ज्यादा था। लोग कच्चे पक्के घरो मे खुश थे। लोग केवल अच्छा खाना खाकर खुश थे। मेरे गांव के सभी घरो मे रौनक रहती थी।  लेकिन जैसे जैसे देश मे आधुनिकीकरण बढ़ता गया, वैसे ही लोगो की जरूरतें और अधिक पैसा कमाने की चाहत बढ़ती गयी। गांव मे पहले सिर्फ दो घरो से ही लोग पैसा कमाने के लिए बाहर देश मे गए थे ।

लेकिन जैसे ही लोगो को पता चलने लगा कि अरब देशो मे रोजगार ज्यादा है तो वह भी जाने की सोचने लगे। इसी सोच   से दलाली का कारोबार सामने आया। ऐसे दलाल जो पैसा लेकर लोगो को अरब देशो मे मजदूरी का काम और वीजा दिलवाते थे। 90 के दशक के आते आते यह कारोबार बहुत बढ़ गया। भारतीय उपमहाद्वीप से जाने मजदूरो की संख्या भी बहुत बढ़ गई। मेरे गांव मे भी अब बहुत से मध्यमवर्गीय परिवारो के लोग मजदूरी के लिए अरब देशो मे चले गए थे ।

आज 2019 मे भी यह सिलसिला जारी है। कुछ समय पहले एक अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा यह रिपोर्ट दी गई कि अरब देशो मे जाने वाले लोगो मे सबसे ज्यादा संख्या भारतीयो की है।  इसी समय दौरान कुछ ऐसे दलाल भी आए जो लोगो को ठगते रहे। गरीब लोगो का पैसा लूट कर यह दलाल भाग जाते थे, लेकिन इतना कुछ होने के बाद भी लोगो मे अरब देशो मे जाने की चाहत कम ना हुई ।

How to make more money, European countries became the center of attraction.

अरब देशो के साथ साथ यूरोपीयन देशो मे भी जाने का मुकाबला चल रहा था। यूरोपीयन देशो मे लोग 90 के दशक से पहले भी जा रहे थे। फर्क बस इतना था कि इन देशो मे केवल वही लोग जा रहे थे जिनके पास पहले से अधिक पैसा था। उस समय मे लोग दलालो को बहुत अधिक पैसा दिया करते थे, और यह खबरे भी सामने आती थी कि लोग गैरकानूनी तरीके से बाहर जा रहे है।

  यूरोप और अमेरिका के देशो मे अरब देशो से कमाई भी ज्यादा होती है। वहा का जीवन स्तर भी बहुत अच्छा था। लेकिन वहा से वापस आकर लोग यहा पर भी वैसे ही रहने लगे। वहा की बोली बोलना, अच्छे चमकदार कपड़े पहनना और महंगी दावतें करना। इन सब चीजों का असर यहां पर रह रहे लोगो पर भी दिखाई देने लगी। उनके मन मे भी चाहत पैदा होने लगी कि वह भी महंगे कपड़े पहने, बड़ी बड़ी गाड़ियों मे घूमे और महंगी दावते करे।

   आज के समय मे जाने का ढंग बदल गया है। यूरोप, अमेरिका और आस्ट्रेलिया जाने वालो की संख्या काफी बढ़ गई है। आज लोग इन देशो पढ़ाई करने के लिए कानूनी तरीके से जाने लगे है। वहा जाकर पढ़ाई के साथ-साथ काम भी करते है। कुछ सालों बाद वहा की नागरिकता भी हासिल कर लेते है। मैं अपने गांव की ही बात बतओ तो मेरा आधे से ज्यादा गांव ऐसे ही किसी दूसरे देश मे बसने लगा है।

                 Written by - Rashpal Singh



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